पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक रूप लेता दिख रहा है। इराक के कुर्द क्षेत्र एरबिल में ड्रोन हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई, जबकि छह अन्य घायल हुए। इस बात की पुष्टि खुद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की। फ्रांसीसी सैनिक वहां अंतरराष्ट्रीय मिशन के तहत इराकी सेना की मदद कर रहे थे।
पश्चिम एशिया में धधक रहा युद्ध अब खतरनाक रूप से फैलता नजर आ रहा है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। इसी बीच इराक के कुर्द इलाके एरबिल में हुए घातक हमले ने हालात की गंभीरता और बढ़ा दी, जहां एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई। इस बात की जानकीरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट के जरिए दी। मैक्रों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह हमला अस्वीकार्य है। उन्होंने मृतक सैनिक के परिवार और साथियों के प्रति गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की।
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मैक्रों ने चेतावनी, दिए घातक संकेत
अपने पोस्ट में मैक्रों ने स्पष्ट किया कि फ्रांसीसी सैनिक 2015 से आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में शामिल हैं और उनकी मौजूदगी केवल आतंकवाद के खिलाफ अभियान तक सीमित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान में युद्ध या किसी अन्य क्षेत्रीय संघर्ष को इस हमले का औचित्य नहीं बनाया जा सकता।
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ड्रोन से हमले का दावा, छह सैनिक घायल भी
रिपोर्ट के अनुसार एरबिल में तैनात फ्रांसीसी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले में पहले छह फ्रांसीसी सैनिक घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनमें से एक सैनिक की मौत हो गई। एरबिल में फ्रांस के सैनिक एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य मिशन के तहत तैनात हैं। इस मिशन का उद्देश्य इराकी सेना की मदद करना और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ चल रही लड़ाई को मजबूत करना है।
फ्रांस समेत कई देशों की सेनाएं इस मिशन में शामिल
गौरतलब है कि फ्रांस समेत कई देशों की सेनाएं इस बहुराष्ट्रीय मिशन में शामिल हैं। ये सैनिक इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग करने का काम करते हैं। इस हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। साथ ही घटना की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके।