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रोबोट क्रांतिः ऑफिस वर्क में 2025 तक मानवों की जगह ले लेंगी मशीनें

Tue, 18 Sep 2018 03:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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साल 2025 तक कार्यस्थलों पर होने वाले आधे से अधिक कार्यों को मानवों की जगह मशीनें अंजाम देंगी। साथ ही, अगले पांच वर्षों में रोबोट क्रांति से 5.8 करोड़ नई नौकरियों का सृजन होगा। एक अध्ययन में यह संभावना जताई गई है। 

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वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के नए शोध के मुताबिक, ऑटोमेशन तथा रोबोटिक्स को अपनाने से मानवों का मशीनों व एल्गोरिदम के साथ काम करने के तरीके में युगांतकारी बदलाव आएगा। हालांकि, जहां तक नई नौकरियों के सृजन की बात है, तो परिदृश्य सकारात्मक है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्तमान में कार्यस्थलों पर 71 फीसदी काम मानव करते हैं, वहीं 29 फीसदी काम मशीनें करती हैं। अनुमान के मुताबिक, साल 2022 तक कुल कार्यों में 58 फीसदी हिस्सेदारी मानवों की, तो 42 फीसदी हिस्सेदारी मशीनों की हो जाएगी। वहीं, 2025 तक कुल 52 फीसदी काम मशीनें करेंगी। 
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13.3 करोड़ नई नौकरियों का होगा सृजन

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि व्यापक स्तर पर उथल-पुथल मचने के बावजूद मशीन, रोबोट तथा एल्गोरिदम के आगमन से मानवों के रोजगार पर वस्तुत: सकारात्मक असर पड़ेगा। 20 देशों में 1.5 करोड़ कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों पर किए गए हमारे सर्वेक्षण के मुताबिक, चौथी औद्योगिक क्रांति की प्रौद्योगिकी द्वारा 13.3 करोड़ नई नौकरियों का सृजन हो सकता है, जबकि 7.5 करोड़ लोगों की जगह मशीनें लेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरियों में सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद है, वहीं नए कार्यों की गुणवत्ता, स्थिति, प्रारूप तथा स्थायित्व में उल्लेखनीय बदलाव होगा। 

डाटा इंजीनियरों की हॉट डिमांड
‘द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018’ नामक शोध के मुताबिक, कंपनियां विशिष्ट कार्य करने वाले कांट्रैक्टर के इस्तेमाल का विस्तार करने, कर्मचारियों के काम करने की व्यवस्था को और अधिक लचीला बनाने, रिमोट स्टाफिंग का इस्तेमाल करने तथा कार्यस्थलों के आधुनिकीकरण की तैयारी में हैं। तमाम उद्योगों में जिन पेशेवरों की मांग बढ़ने वाली है, उनमें डाटा एनालिस्ट्स एवं साइंटिस्ट, सॉफ्टवेयर एंड एप्लिकेशंस डेवलपर्स तथा ई-कॉमर्स एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें सभी प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ हैं। 

डब्ल्यूईएफ के संस्थापक एवं कार्यकारी चेयरमैन क्लाउस श्वाब ने कहा कि कंपनियां अपने मौजूदा कार्यबलों का कौशल बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। ये कर्मचारी आजीवन सीखने के प्रति अतिसक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हैं और सरकारें इस कार्यबल के बदलाव में मदद करने के लिए एक सक्षम महौल का निर्माण करती हैं। यह हमारे समय की अहम चुनौती है। 
डब्ल्यूईएफ के मुताबिक, वैसे कार्य जिनमें ‘मानव कौशल’ का पूरी तरह इस्तेमाल होता है, जैसे सेल्स एंड मार्केटिंग पेशेवर, नवाचार प्रबंधक तथा कस्टमर सर्विस वर्कर्स की मांग में भी वृद्धि देखी जा रही है। 
 
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खत्म होंगे व्हाइट कॉलर जॉब्स 

कुछ ऐसे कार्य जिनके खत्म होने की आशंका है, उनमें रूटीन आधारित व्हाइट कॉलर जॉब्स हैं जिनमें डाटा इंट्री क्लर्क, अकाउंटिंग व पेरोल क्लर्क शामिल हैं। डब्ल्यूईएफ के सेंटर फॉर द इकनॉमी एंड सोसायटी के प्रमुख सादिया जाहिदी ने कहा कि मशीनीकरण के युग में कंपनियों को गतिशील, अपनी अलग पहचान तथा प्रतिस्पर्धी रहने के लिए जरूरी है कि वे मानव पूंजी में निवेश करें। ऐसा करना आर्थिक तरह नैतिक दोनों रूपों में अनिवार्य है। बिना किसी सक्रिय दृष्टिकोण के कंपनियां व कर्मचारी चौथी औद्योगिक क्रांति की आर्थिक संभावना से महरूम हो सकते हैं। 
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