पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में भी हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में न्यूनतम पारा 8.1 डिग्री गिर गया। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के कई शहरों में पारा पांच डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। उत्तर भारत को भीषण सर्दी से अभी राहत नहीं मिलने वाली है, क्योंकि अगले चार-पांच दिन घने कोहरे और शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। केदारनाथ धाम में मंदिर और आसपास के इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछी दिखी। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू-मनाली व लाहौल की चोटियों पर बर्फबारी हुई है। ताबो में तापमान माइनस 6.8 डिग्री सेल्सियस रहा। कश्मीर में सबसे कम तापमान गुलमर्ग में माइनस 6.5 डिग्री रहा। पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में भी ठिठुरन बढ़ गई है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ में पारा 4 डिग्री तक गिर गया। पंजाब में फरीदकोट 5.5 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे ठंडा स्थान रहा।
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कोहरा से कई जगह दृश्यता शून्य के करीब, दिल्ली में आज येलो अलर्ट
उत्तराखंड के साथ ही जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के ज्यादातर इलाके घने कोहरे की चपेट में हैं। कई जगह दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। दिल्ली में रविवार को घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
दिल्ली-एनसीआर की हवा खराब
दिल्ली-एनसीआर में हवा की सेहत कुछ सुधरी है, पर अब भी खराब श्रेणी में है। शनिवार शाम चार बजे दिल्ली में 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 267 रहा। फरीदाबाद में एक्यूआई 222, गुरुग्राम में 244, नोएडा में 242, ग्रेटर नोएडा में 239 और गाजियाबाद में एक्यूआई 262 दर्ज किया गया। 200 से अधिक और 300 से कम एक्यूआई खराब श्रेणी में आता है।
सात दिन तक कोहरे के आसार
उत्तर भारत में अगले सात दिनों तक रात और सुबह के समय अत्यंत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। उत्तराखंड और राजस्थान में 4 और 5 जनवरी को घना कोहरा रहेगा। कुछ जगहों पर शीत लहर भी जारी रहेगी। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सात जनवरी तक शीतलहर की स्थिति रहने की संभावना है।
घने कोहरे, शीतलहर और पाले से फसलों पर संकट
मौसम की इस तीव्रता का सीधा असर सब्जी उत्पादकों और रबी फसलों पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों और अधिकृत एजेंसियों ने किसानों के लिए सतर्कता और व्यावहारिक खेती प्रबंधन को लेकर विस्तृत सलाह दी है। आईएमडी के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। घना कोहरा, शीतलहर और पाले की स्थिति रात और तड़के फसलों के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह मानी जा रही है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह का मौसम खासकर सब्जियों और कोमल पौधों के ऊतकों को झुलसा सकता है। आईसीएआर और राज्य कृषि विभागों के विशेषज्ञों के मुताबिक आलू, टमाटर, मटर, गोभी, फूलगोभी और हरी पत्तेदार सब्जियां ठंड और पाले के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। पाला पड़ने की आशंका वाले क्षेत्रों में रात के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है, क्योंकि गीली मिट्टी अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहती है और तापमान में अचानक गिरावट के प्रभाव को कम करती है। खेतों में पॉलिथीन शीट, एग्रीकल्चर मल्च या अस्थायी लो-टनल का उपयोग कर पौधों को ढकने से भी पाले का असर घटाया जा सकता है।
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कोहरा छंटने के बाद ही करें कीटनाशक का छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्रों ने चेतावनी दी है कि लगातार कोहरे और अधिक नमी के कारण सब्जियों और फसलों में झुलसा, डैम्पिंग ऑफ और पत्ती धब्बा जैसे फंगल रोग तेजी से पनप सकते हैं। डैम्पिंग ऑफ एक फंगल रोग है, जो अधिक नमी, ठंड और घने कोहरे में खासकर नर्सरी व छोटी पौध पर हमला करता है। इसलिए किसानों को सलाह है कि वे कोहरा छंटने के बाद ही खाद, कीटनाशक या फफूंद नाशक का छिड़काव करें।
गेहूं, चना और सरसों की सिंचाई पर संतुलन जरूरी
रबी फसलों को लेकर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि अत्यधिक ठंड के बावजूद सिंचाई पूरी तरह बंद करना सही नहीं है। गेहूं, चना और सरसों में हल्की और समयबद्ध सिंचाई जारी रखने की सलाह दी गई है। आईसीएआर के वैज्ञानिकों के अनुसार इस दौर में नाइट्रोजन उर्वरक की अतिरिक्त मात्रा देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पौधे अधिक कोमल हो जाते हैं और पाले से क्षति की संभावना बढ़ जाती है।
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