रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सोमवार को बहुप्रतीक्षित नई रक्षा खरीद नीति की घोषणा की। इस नई नीति में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दिया गया है। परिकर ने उम्मीद जताई कि हम इस क्षेत्र में अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही बड़े निर्यातक बन कर उभरेंगे।
संभव है कि हम भविष्य में स्वदेशी तकनीक से विकसित ब्रम्होस, आकाश और छोटी मिसाइल तेजस की तकनीक भी निर्यात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति से खरीद प्रक्रिया पारदर्शी होगी। दक्षिणी गोवा में आयोजित चार दिवसीय रक्षा प्रदर्शनी- नौवें डिफेंस एक्सपो इंडिया का उद्घाटन करते हुए परिकर ने कहा कि नई रक्षा खरीद नीति (डीपीपी) से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। परिकर ने कहा कि मौजूदा समय में दो हजार करोड़ के रक्षा उपकरण निर्यात किए जा रहे हैं, जो हमारे कुल उत्पादन का 10 फीसदी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मेक इन इंडिया के तहत निर्यात का दायरा पांच हजार करोड़ तक बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नई डीपीपी को अभी रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है और आगामी 15 दिन में इसकी प्रतियां उपलब्ध करा दी जाएंगी। परिकर ने कहा कि नई नीति में एक नई ‘भारतीय डिजाइन, निर्माण और विनिर्मित (आईडीडीएम)’ श्रेणी पेश की गई है। इससे स्थानीय रक्षा इकाइयों को लाभ होगा। मंत्री ने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 49 फीसदी किया गया है।