देशभर में वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर सियासी गर्माहट तेज है। इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक पर सभी पार्टियों के साथ चर्चा करने की बात पर जोर दिया। मंगलवार को उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर बुधवार को लोकसभा में चर्चा चाहती है। बता दें कि इस विधेयक को बुधवार को प्रश्नकाल के बाद लोकसभा में पेश किया जाएगा। रिजिजू ने बताया कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में इस पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।
हम इस विधेयक पर चर्चा चाहते है- रिजिजू
इसके साथ ही रिजिजू ने कहा कि हम वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा चाहते है। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, और देश यह जानना चाहता है कि किस दल का इस विधेयक पर क्या रुख है।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहता, तो वे उन्हें रोक नहीं सकते।
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विपक्ष ने जताई नाराजगी
वहीं किरेन रिजिजू के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद गौरव गगोई ने नाराजगी जताई। उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विरोध जताते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों को मजबूरी में वॉकआउट करना पड़ा, क्योंकि सरकार सिर्फ अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रही है और विपक्ष की राय नहीं सुन रही है। गोगोई ने कहा कि सदन से वॉकआउट करना हमारे पास अंतिम विकल्प था। पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे लोकसभा में लोकतंत्र की आवाज को दबाया जा रहा है।
भाजपा ने लोकसभा में जारि किया व्हिप
इसी बीच कल की चर्चा के लिए भाजपा ने सभी लोकसभा सांसदों को कल 2 अप्रैल को संसद में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित करने के लिए पेश किया जाएगा। इससे पहले इस पर सदन में चर्चा होगी। पार्टी की ओर से जारी व्हिप में कहा गया कि बुधवार को सदन में अति महत्वपूर्ण विधायी कार्य है। उन्हें पारित करने के लिए सभी लोग पार्टी का समर्थन करें और वोटिंग करें। व्हिप में सभी सांसदों से पूरे दिन सदन में ही मौजूद रहने को कहा गया है। भाजपा के पास लोकसभा में 240 सांसद ही हैं।
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वक्फ संधोशन विधेयक में अबतक क्या हुआ..जानिए
गौरतलब है कि सबसे पहले वक्फ संशोधन विधेयक पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है ताकि वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में सुधार किया जा सके। इसके तहत वक्फ बोर्डों की दक्षता बढ़ाने के लिए कई बदलाव किए जाएंगे, जैसे पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में तकनीकी मदद शामिल है। बता दें कि वक्फ अधिनियम को 1995 को लंबे समय से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण जैसे कई मुद्दों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।