हम पेड़ के नीचे खड़े रहते थे। आप भाग्यशाली हैं कि आपको चैंबर मिले। भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने गुरुवार को पुराने दिनों को याद करते हुए वकीलों से यह बात कही। ये वकील सुप्रीम कोर्ट परिसर में वकीलों को कक्षों के आवंटन को चुनौती देने वाली याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे थे। जस्टिस रमना ने कहा कि वकालत का अभ्यास करने के लिए कोई जगह मिलना एक बड़ा उपकार है।
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उन्होंने कहा, मैं आपको बता सकता हूं, दिल्ली को छोड़कर देश में कहीं भी आपको चैंबर नहीं मिलते हैं। अदालत की प्रशासनिक शाखा 468 वकीलों की एक सूची के साथ सामने आई है जिन्हें कक्ष आवंटित किया जाएगा। कक्षों के आवंटन के कुछ पहलुओं को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई है और एक पीठ जिसमें न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं, उसने इसे 25 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि काफी प्रयास के बाद आखिरकार कुछ हुआ है, इसलिए कक्षों की सुविधा का आनंद लें। मैं मामले के गुण-दोष के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। कृपया मुझे गलत न समझें। मैं प्रधान न्यायाधीश के तौर पर बात नहीं कर रहा हूं। वकीलों के कल्याण और हित में और बड़ी मुश्किलों के साथ आखिरकार कुछ हुआ है। सीजेआई ने कहा कि आवंटन समिति के तीन न्यायाधीशों ने आवंटियों की सूची को अंतिम रूप देने में काफी समय लगाया है और अब लगभग 400-500 लोगों को लाभ मिल रहा है। आप इसे रोकना चाहते हैं।