केंद्रीय पर्यटन सचिव वी विद्यावती ने बुधवार को सीमावर्ती गांवों के सरपंचों और ग्राम प्रधानों के एक समूह के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन गावों की कीमत पर नहीं। उन्होंने कहा कि साहसिक पर्यटन, पर्यटन मंत्रालय के लिए एक महत्वपूर्ण खंड है और 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत चुने गए गांवों में इसकी अपार संभावनाएं हैं।
केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों में उत्तरी सीमा से सटे 46 ब्लॉकों में चिन्हित गांवों के व्यापक विकास की परिकल्पना की गई है। पर्यटन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विद्यावती ने यहां होटल अशोका में कार्यक्रम के तहत चुने गए सीमावर्ती गांवों के 300 सरपंचों और ग्राम प्रधानों के साथ एक सत्र आयोजित किया।
मंगलवार को ये ग्राम प्रधान लाल किले पर 77वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए। वे कार्यक्रम में आमंत्रित 1,800 विशेष अतिथियों में शामिल थे। बैठक में पर्यटन के विभिन्न पहलुओं, विभिन्न गांवों के सामने आने वाली चुनौतियों और पर्यटन विकास के लिए संभावित समाधानों पर चर्चा शामिल थी। इसमें कहा गया है कि प्रतिभागियों ने बुनियादी ढांचे, सामुदायिक जुड़ाव, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण सहित विषयों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा, 'हम पर्यटन उत्सव मनाने हैं और इसके लिए आपको दिल्ली आने की जरूरत नहीं है। हम आपके साथ त्योहार मनाने के लिए आपके गांवों में पहुंचेंगे।' पर्यटन सचिव ने कहा कि साहसिक पर्यटन, पर्यटन मंत्रालय के लिए एक महत्वपूर्ण खंड है और जीवंत गांवों में इसकी अपार संभावनाएं हैं।
स्थिरता पर जोर देते हुए पर्यटन सचिव ने कहा, 'हमें पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए लेकिन गांवों की कीमत पर नहीं।' उन्होंने बैठक में यह भी आश्वासन दिया कि कार्यक्रम के तहत गांवों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। सरपंचों ने अपने गांवों में पर्यटन के विकास, संबंधित चुनौतियों और उपलब्ध अवसरों के बारे में अपने विचार साझा किए।