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Karnataka: 'पानी राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानता', बांध सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोले सिद्धारमैया

Fri, 13 Feb 2026 03:36 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कहा कि पानी का मुद्दा राजनीति से ऊपर है। अगर भारत को आगे बढ़ना है तो बांधों की सुरक्षा, तकनीकी मजबूती और राज्यों के बीच सहयोग बहुत जरूरी है। वे बंगलूरू में बांध सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
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सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बंगलूरू में बांध सुरक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 'पानी राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानता, इसलिए सुरक्षा मानकों को भी राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।' यह दो दिवसीय सम्मेलन भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में आयोजित किया गया।
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बांधों की हालत पर चिंता
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में कुल 6,628 बड़े बांध हैं, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बांध मालिक देश है। कर्नाटक में 231 बड़े बांध हैं और यह देश में छठे स्थान पर है। करीब 70% बांध 25 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पुराने बांधों की सुरक्षा जांच, आधुनिकीकरण और जोखिम के अनुसार संचालन बहुत जरूरी हो गया है।
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जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा खतरे
सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि आज हम जलवायु परिवर्तनके कारण भारी बारिश और सूखे जैसी चरम परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। भूकंप का खतरा, जलाशयों में गाद भरना और पुराने ढांचे की कमजोरी- ये सब मिलकर बड़ा जोखिम पैदा कर रहे हैं। अब बांध सुरक्षा सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम से चलने वाले बांधों को साइबर हमलों और तकनीकी तोड़फोड़ से भी बचाना जरूरी है।

सहयोग से ही होगा समाधान- सिद्धारमैया
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट सिर्फ कागजी प्रक्रिया न रहें, बल्कि गंभीरता से लागू हों। आधुनिक तकनीक जैसे रिमोट सेंसिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग बढ़ाया जाए। स्थानीय लोगों को भी जागरूक और तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि जब नीति, विज्ञान, इंजीनियरिंग, वित्त और जनता की भागीदारी एक साथ आएगी, तभी बांध सुरक्षित रहेंगे।

बड़े प्रोजेक्ट्स पर सरकार ने दिया अपडेट
इस दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी सम्मेलन में संबोधित किया। उन्होंने बताया 2012 में शुरू हुआ डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (डीआरआईपी) एक अच्छा उदाहरण है, जिसे भारत सरकार ने विश्व बैंक की मदद से शुरू किया था। कर्नाटक में डीआरआईपी के दूसरे और तीसरे चरण में 58 बांधों पर 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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मेकेदातु परियोजना पर भी बोले डीके शिवकुमार
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने बताया कि मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से सकारात्मक फैसला मिला है। इस परियोजना से बंगलूरू को पीने का पानी मिलेगा, कावेरी जल बंटवारे का पालन होगा और लगभग 400 मेगावाट बिजली भी पैदा होगी।

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