फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Water dispute with Pakistan: वर्ल्ड बैंक ने नियुक्त किया तटस्थ विशेषज्ञ, भारत ने कहा- आकलन करेंगे

Wed, 19 Oct 2022 06:04 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व बैंक ने सोमवार को कहा कि उसे विश्वास है कि तटस्थ विशेषज्ञ और पंचाट न्यायलय के अध्यक्ष अपने अधिकार क्षेत्र पर निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक विचार करेंगे।
विज्ञापन
world bank - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत ने बुधवार को कहा कि उसने किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित मामले में एक तटस्थ विशेषज्ञ और पंचाट न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति की विश्व बैंक की घोषणा का संज्ञान लिया है। 1960 की सिंधु जल संधि के तहत आने वाली इन दो परियोजनाओं को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद चल रहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमने किशनगंगा और रातले परियोजनाओं से संबंधित चल रहे मामले में एक तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता अदालत के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए विश्व बैंक की घोषणा का संज्ञान लिया है। 

विज्ञापन


विश्व बैंक ने सोमवार को कहा कि उसे विश्वास है कि तटस्थ विशेषज्ञ और पंचाट न्यायलय के अध्यक्ष अपने अधिकार क्षेत्र पर निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक विचार करेंगे, क्योंकि उन्हें जल संधि के तहत ऐसा करने का अधिकार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विश्व बैंक की अपनी घोषणा में स्वीकार करते हुए कि 'दो प्रक्रियाओं को एक साथ करना व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियों से भरा है, भारत इस मामले का आकलन करेगा। भारत का मानना है कि सिंधु जल संधि का कार्यान्वयन संधि के अनुसार और भावना में होना चाहिए। 

भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की बातचीत के बाद 1960 में संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विश्व बैंक समझौते का हस्ताक्षरकर्ता था। संधि दोनों देशों के बीच नदियों के उपयोग के संबंध में सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक तंत्र निर्धारित करती है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान इस बात पर असहमत हैं कि किशनगंगा और रातले जलविद्युत संयंत्रों की तकनीकी डिजाइन विशेषताएं संधि का उल्लंघन करती हैं या नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें