केंद्रीय मंत्री ने वक्फ बोर्ड पर अपनी बात रखते हुए तमिलनाडु के उस गांव का भी जिक्र कर दिया जिसने एक पूरे गांव को अपनी संपत्ति बताकर पूरे देश को चौंका दिया था। दरअसल यह मामला तमिलनाडु के तिरुची जिले का है। तिरुचि जिले के तिरुचेंथुरई नाम का एक गांव है। इस गांव की पूरी बसावट लगभग 369 एकड़ में हुई है। गांव में एक हिंदू मंदिर भी है जिसे लगभग 1500 वर्ष पूर्व का बना हुआ बताया जाता है।
इसी गांव का एक किसान राजगोपाल अपना कर्ज चुकाने के लिए अपनी 1.2 एकड़ जमीन बेचने के लिए एक सौदा कर रहा था। जब पूरा सौदा लगभग पूरा हो चुका था, तहसील कार्यालय के रजिस्ट्रार ने उसे यह बताया कि वह यह सौदा नहीं कर सकता था क्योंकि यह पूरा गांव तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का है और इस गांव की किसी भी जमीन का सौदा उसकी अनुमति के बिना नहीं हो सकता था।
गांव वाले यह जानकर बहुत हैरान हुए थे कि वे कई पीढ़ियों से उसी गांव में रहते आए थे, लेकिन अचानक ही यह गांव किसी दूसरे की संपत्ति कैसे हो गया। लोगों को सबसे अधिक इस बात पर आश्चर्य हो रहा था कि इसी गांव में लगभग 1500 साल पुराने मंदिर को भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति बता दी गई थी। लोगों को हैरानी इस बात पर थी कि 1500 साल पुराने इस मंदिर-गांव पर बाद में बने वक्फ बोर्ड का अधिकार कैसे हो सकता है।
तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने राज्य के 18 गांवों को पूरी तरह अपनी संपत्ति करार दे दिया था। यह मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में सियासत गर्म हो गई थी। किरेन रिजिजू ने अपने संबोधन में गुजरात के सूरत नगर निगम के भवन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड ने एक सार्वजनिक भवन को भी अपनी संपत्ति घोषित कर दी थी। इसी तरह हरियाणा के यमुनानगर जिले के जठलाना गांव में एक सिख धार्मिक स्थल गुरुद्वारे को वक्फ को स्थानांतरित कर दिया गया था।