कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने दावा किया, 'वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य संविधान को कमजोर करना, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करना, भारतीय समाज को विभाजित करना और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करना है।' उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से आज लोकसभा में पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सत्त पक्ष पर हमला बोला।
गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता के दावे को किया खारिज
वहीं कांग्रेस नेता के दावे को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और किरेन रिजिजू ने खारिज करते हुए कि सभी दलों की राय को ध्यान में रखते हुए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की चर्चा हुई थी, कांग्रेस नेता ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई खंड-दर-खंड चर्चा नहीं हुई। इस पर गौरव गोगोई ने कहा, 'विपक्ष की तरफ से सुझाए गए एक भी संशोधन को स्वीकार नहीं किया गया।' उन्होंने आगे ये भी आरोप लगाया कि, 'जिन्हें वक्फ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उन्हें जेपीसी में आमंत्रित किया गया।'
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'भविष्य में अन्य अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाएगी सरकार'
विधेयक के खिलाफ बहस करते हुए गौरव गोगोई ने चेतावनी दी कि सरकार भविष्य में अन्य अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'आज वे एक समुदाय की जमीन को निशाना बना रहे हैं, कल वे दूसरे समुदाय को निशाना बनाएंगे।' इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संविधान पढ़ते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25(1) में उल्लिखित 'धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और प्रचार करने' की किसी की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह वक्फ प्रबंधन से संबंधित है। इसका दूसरों के धर्म में हस्तक्षेप से कोई लेना-देना नहीं है।'
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किरेन रिजिजू के दावों का विरोध करते हुए गौरव गोगोई ने एक संशोधन की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को तभी वक्फ घोषित कर सकता है, जब वह कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन करता हो। उन्होंने कहा, 'क्या वे अन्य धर्मों से प्रमाण पत्र मांगेंगे कि आपने पांच साल पूरे किए हैं या नहीं? इस विधेयक में ऐसा क्यों पूछा जा रहा है? सरकार धर्म के इस मामले में हस्तक्षेप क्यों कर रही है।'
क्या है वक्फ संशोधन बिल?
'वक्फ (संशोधन) बिल', जिसे 'यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (यूएमईईडी) बिल' भी कहा जाता है, का मकसद वक्फ संपत्तियों की बेहतरी और पारदर्शिता बढ़ाना है। इसमें डिजिटलीकरण, ऑडिट, पारदर्शिता और अवैध कब्जों को हटाने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। बता दें कि 1995 में बना वक्फ अधिनियम लंबे समय से भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अतिक्रमण जैसी समस्याओं के कारण विवादों में रहा है।