नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक लाखों लोग बरसों से इंसाफ के इंतजार में हैं। हजारों केस तो 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जिनमें अब तक न्याय नहीं मिला है। 41,682 आपराधिक मामले तीन दशक से लंबित हैं।
| इंतजार |
सिविल केस लंबित |
आपराधिक केस लंबित |
कुल लंबित केस |
| 0 से 1 साल |
41,42,201 |
99,14,998 |
1,40,57,161 |
| 1 से 3 साल |
20,65,835 |
52,39,012 |
73,04,816 |
| 3 से 5 साल |
11,42,027 |
26,55,548 |
37,97,566 |
| 5 से 10 साल |
10,50,526 |
31,50,402 |
42,00,927 |
| 10 से 20 साल |
4,12,842 |
15,21,253 |
19,34,095 |
| 20 से 30 साल |
94,780 |
2,69,846 |
3,64,626 |
| 30 साल से ज्यादा |
30,156 |
41,682 |
71,838 |
फास्ट ट्रैक कोर्ट के बावजूद लंबित मामले
दुष्कर्म व पॉस्को एक्ट (12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म) जैसे गंभीर मामलों से निपटने के लिए देश में 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने का प्रस्ताव है। इसके बावजूद 1,66,882 दुष्कर्म व पॉस्को एक्ट के मामले इन अदालतों में लंबित हैं।
- यूपी की फास्ट ट्रैक अदालतों में सबसे ज्यादा 36,008 दुष्कर्म व पॉस्को के मामले लंबित
- 22,775 लंबित मामलों के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर और महाराष्ट्र 20221 तीसरे नंबर पर
- 218 फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की गई हैं उत्तर प्रदेश में
- निचली अदालत में सबसे पुराना सिविल मुकदमा 1951 का है, जो पश्चिम बंगाल की हुगली में शुरू हुआ था