पश्चिम बंगाल चुनाव में पहचान पत्र दिखाती महिलाएं
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बंगाल में बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की आंधी में वाम मोर्चा - कांग्रेस गठबंधन के साथ ही भाजपा व अन्य राजनीतिक पार्टियां तिनके की तरह उड़ गए। ममता बनर्जी इस ऐतिहासिक जीत के लिए राज्य में हुए विकास को श्रेय दे रही हैं। बावजूद इसके आठ लाख से अधिक मतदाताओं ने नोटा यानी उपयुक्त में कोई नहीं बटन दबाकर यह साबित कर दिया कि सभी प्रमुख पार्टियों द्वारा उतारे गए उम्मीदवारों में से उन्हें कोई भी पसंद नहीं है।
बंगाल में इस बार बंपर वोटिंग हुई जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को 44.9 फीसदी, माकपा को 19.7 फीसदी, कांग्रेस को 12.3 फीसदी भाजपा को 10.2 फीसदी, फॉरवर्ड ब्लॉक को 2.8 फीसदी, निर्दलीय को 2.2 फीसदी, आरएसपी को 1.5 फीसदी, सीपीआई को 1.4 फीसदी, एसयूसीआई को सात फीसदी और बीएसपी को पांच फीसदी वोट मिला है। वहीं 1.5 फीसदी यानी आठ लाख 30 हजार से अधिक मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर स्पष्ट कर दिया कि उनके लिए कोई उम्मीदवार उपयुक्त नहीं है।
चुनाव आयोग की आंकड़ों को मानें तो किसी - किसी विधानसभा केंद्र के मतदाताओं ने सर्वाधिक पांच से दो हजार तक नोटा का बटन दबा कर उम्मीदवारों को लेकर अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। उनमें से हावड़ा विधानसभा प्रमुख है। सबसे अधिक नोटा का प्रयोग मध्य हावड़ा में हुआ है। यहां के 4135 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया है। वहीं दक्षिण हावड़ा के भी मतदाताओं ने नोटा पर अधिक विश्वास दिखाया है। यहां 3816 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया है। उत्तर हावड़ा सीट से 1070 मतदाताओं जबकि बाली में 1598 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया। शिवपुर विधानसभा क्षेत्र में 3132 मतदाताओं ने भी किसी को अपना मत नहीं दिया है।