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Vote Theft Row: 'अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने का दबाव नहीं बना सकते'; राहुल के दावों के बीच EC का फैक्ट चेक

Wed, 13 Aug 2025 11:25 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों पर स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियां कानून के अनुसार तैयार की जाती हैं। मतदाता सूची में कोई भी सुधार, नाम काटना या जोड़ना हमेशा कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अंतिम मतदाता सूची से आपका नाम हटाने के लिए दबाव नहीं बना सकता। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों का फैक्ट चेक किया। इस दौरान चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी मतदाता का नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाने के लिए दबाव नहीं बना सकता। 

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चुनाव आयोग ने एक्स पर पोस्ट में कहा, मतदाता सूचियां कानून के अनुसार तैयार की जाती हैं। मतदाता सूची में कोई भी सुधार, नाम काटना या जोड़ना हमेशा कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अंतिम मतदाता सूची से आपका नाम हटाने के लिए दबाव नहीं बना सकता। 

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कुछ मामलों का स्वत: संज्ञान लेकर जांच कर सकता है ईआरओ
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि एक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) कुछ मामलों की स्वत: संज्ञान लेकर जांच कर सकता है, लेकिन केवल प्रिंट, टीवी या सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर हजारों नोटिस जारी नहीं कर सकता, जिससे बिना किसी ठोस सबूत के हजारों योग्य मतदाताओं को परेशान किया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने ये दिया तर्क 
चुनाव आयोग ने तर्क देकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति, जो आपके विधानसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं है, आपके नाम को मतदाता सूची में गलत तरीके से शामिल किए जाने का आरोप लगाता है, तो वह सीधे ऐसा नहीं कर सकता। उसे ईआरओ के पास आवेदन करना होगा। मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20(3)(बी) के तहत, ऐसे व्यक्ति को अपनी बात शपथ लेकर कहनी होगी। यानी जो भी सबूत देगा, वह शपथ के साथ होना चाहिए।

नियम 20(3)(बी) के तहत ईआरओ को दे सकते हैं सबूत
चुनाव आयोग ने कहा कि अगर कोई नाम गलत है, तो उस नाम की सूची घोषणा/शपथ पत्र के साथ जमा करनी होगी। अगर किसी को लगता है कि कोई नाम गलत जोड़ा गया है, तो वह नियम 20(3)(बी) के तहत हस्ताक्षरित घोषणा/शपथ के साथ सबूत ईआरओ को दे सकता है। चुनाव आयोग ने कहा, 'यह नियम योग्य मतदाताओं को आपके विधानसभा क्षेत्र से बाहर के किसी भी व्यक्ति/व्यक्तियों से बचाता है, जो आपका कीमती वोट काटने का इरादा रखते हों।'

चुनाव आयोग का यह बयान तब आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में 'वोट चोरी' हुई है और निष्पक्ष चुनावों के लिए साफ-सुथरी मतदाता सूची जरूरी है।

चुनाव आयोग से डिजिटल मतदाता सूची जारी करने की मांग
कांग्रेस सांसद ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'वोट चोरी, एक व्यक्ति, एक वोट' के मूल विचार पर हमला है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए साफ मतदाता सूची जरूरी है। चुनाव आयोग से हमारी मांग स्पष्ट है- पारदर्शी बनें और डिजिटल मतदाता सूची जारी करें ताकि लोग और पार्टियां उनका ऑडिट कर सकें। यह लड़ाई हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए है।'

आयोग ने राहुल गांधी के मकान नंबर जीरो के दावों को बताया झूठा
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के मकान नंबर जीरो के दावों को झूठा करार दिया है। आयोग ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बंगलूरू के भोगनहल्ली के कुछ निवासियों के बयान हैं। वीडियो में लोगों ने बताया है कि राहुल गांधी ने जिन मकान नंबरों को काल्पनिक रूप से 'शून्य' बताया है। वह सभी करीब 15 वर्षों से अधिक समय से इसमें रह रहे हैं।

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आयोग ने कहा इन सभी ने बताया है कि वह लोग स्थायी तौर पर यहां निवास करते हैं और यह बेहद सामान्य है कि घर का पता शून्य है। दरअसल राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे मतदाताओं को फर्जी बताया था। वीडियो में और भी कई उदाहरण दिए गए हैं। इनमें राजेश पुत्र श्रीकांत, सौंदर्या, कुमार वेंकट, बंटी कुमार ने जारी वीडियो में अपनी बात कही है। इसमें उन्होंने बताया है कि वह स्थानीय निवासी हैं, उनका घर का पता है और नम्बर शून्य है। चुनाव आयोग ने कहा कि वह बार-बार राहुल गांधी से आग्रह कर रहे हैं कि वह अपनी शिकायत दर्ज कराएं पर 7 अगस्त से अब तक उन्हें शिकायतों के दावों को लेकर कोई तथ्य नहीं दिए गए हैं।

शिकायत नहीं देंगे तो समाधान कैसे होगा
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी द्वारा मृत वोटरों के साथ चाय पीने के मामले में जब तक वह आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज नहीं करा देते तब तक समाधान कैसे होगा। उन्हें चाहिए कि वह शिकायत दर्ज कराएं, ताकि उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कराए जा सकें।

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