ED Action In Money Laundering Case: प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन मामले में कार्रवाई करते हुए एक अभिनेत्री और उद्यमी संदीपा विर्क को गिरफ्तार किया है। संदीपा विर्क की इंस्टाग्राम आईडी के अनुसार, वह एक अभिनेत्री व उद्यमी हैं और हाईबोकेयर.कॉम वेबसाइट की संस्थापक भी हैं।
प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। बता दें कि, ईडी ने हाईबोकेयर.कॉम की मालकिन संदीपा विर्क को गिरफ्तार किया है। ईडी ने सोमवार और मंगलवार को संदीपा और उनके सहयोगियों के दिल्ली और मुंबई में मौजूद तमाम ठिकानों पर छापेमारी भी की। बता दें कि संदीपा खुद को अभिनेत्री और कॉस्मेटोलॉजिस्ट बताती है।
विज्ञापन
गिरफ्तारी के बाद अदालत में संदीपा की पेशी
ईडी ने छापेमारी के बाद मंगलवार को ही संदीपा को गिरफ्तार कर लिया और विशेष अदालत में पेश किया। जहां से संदीपा को 14 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं संदीपा ने दावा किया है कि वह हाईबोकेयर.कॉम नाम की एक त्वचा देखभाल उत्पाद बेचने वाली वेबसाइट की मालकिन हैं। जबकि ईडी ने दावा किया है कि यह वेबसाइट मनी लॉन्ड्रिंग के लिए मुखौटा है। जानकारी के मुताबिक, एजेंसी संदीपा और सहयोगियों पर गलत बयानी के जरिये अनुचित प्रभाव डालने और झूठे बहाने से पैसे मांग कर लोगों को धोखा देने के आरोप की जांच कर रहा है।
ईडी ने छापे के दौरान जब्त किए सबूत
पूरे मामले में ईडी ने कहा कि संदीपा पूर्ववर्ती रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अंगाराई नटराजन सेथुरमन नाम के एक शख्स के भी संपर्क में थी। एएन सेथुरमन के घर पर तलाशी में इसकी पुष्टि हुई है। इस छापों के दौरान कुछ ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जो निजी फायदे के लिए पैसों के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं। जानकारी के मुताबिक, ईडी ने पंजाब पुलिस की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है। छापों के दौरान अपराध सिद्ध करने वाले कई दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी ने खुद को संदीपा विर्क का सहयोगी बताने वाले फारुख अली नाम के एक व्यक्ति का बयान भी दर्ज किया।
वेबसाइट पर दिखाए गए सौंदर्य उत्पाद असली नहीं
ईडी के मुताबिक संदीपा विर्क का वेब पोर्टल एफडीए-अनुमोदित सौंदर्य उत्पाद बेचता था। हालांकि, वेबसाइट पर जिन उत्पादों का ब्योरा था वे असल में थे ही नहीं। एफडीए अप्रूवल भी फर्जी था। पोर्टल में कंज्यूमर रजिस्ट्रेशन का भी कोई विकल्प नहीं था। भुगतान गेटवे की लगातार समस्याएं बनी हुई हैं। ईडी ने दावा किया कि वेबसाइट की जांच में सोशल मीडिया पर बहुत कम सक्रियता, निष्क्रिय व्हाट्सएप संपर्क नंबर और पारदर्शी संगठनात्मक विवरणों का अभाव पाया गया, जो सभी गैर-वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि के निष्कर्ष को पुष्टि करते हैं।
ईडी के अनुसार, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के लगभग 18 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन 2018 में प्रूडेंशियल ऋण मानदंडों का उल्लंघन करके एएन सेथुरमन को वितरित किया गया था। धनराशि ऐसी शर्तों के तहत उधार दी गई थी, जिनमें मूल राशि के साथ-साथ ब्याज को भी स्थगित करने की अनुमति थी। कई बार छूट दी गई और कोई उचित जांच-पड़ताल नहीं की गई थी। ईडी ने दावा किया कि इसके अलावा रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की ओर से प्रूडेंशियल मानदंडों का उल्लंघन करके 22 करोड़ रुपये का आवास ऋण प्रदान किया गया। इसमें आरोप लगाया गया है कि इन ऋणों का बड़ा हिस्सा आखिरकार गबन कर लिया गया और उसका भुगतान नहीं किया गया।