कर्नाटक में पूर्व भाजपा विधायक सुभाष गुट्टेदार के घर बाहर जली हुई मतदाता सूची मिलने के बाद एसआईटी ने सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। इस मामले में जल्द और पूछताछ और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगे थे।
कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र में कथित 'वोट चोरी' घोटाले की जांच कर रही एसआईटी (एसआईटी) को एक बड़ा सुराग मिला है। शनिवार को पूर्व भाजपा विधायक सुभाष गुट्टेदार के घर के पास बड़ी मात्रा में जले हुए वोटर रिकॉर्ड बरामद किए गए। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अलंद सीट पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में 'नकली फोन कॉल्स के जरिए कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए'। इसी शिकायत पर सरकार ने एसआईटी गठित की थी।
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BJP MLA के घर के पास क्यों मिले जले रिकॉर्ड?
सुभाष गुट्टेदार के घर के बाहर जले हुए वोटर दस्तावेजों के ढेर मिलने के बाद एसआईटी ने जांच और तेज कर दी है। इससे पहले शुक्रवार को एसआईटी ने सुभाष गुट्टेदार, उनके बेटों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़े कई ठिकानों पर छापे मारे थे।
आरोपों पर सुभाष गुट्टेदार ने क्या दी सफाई?
इन आरोपों पर सफाई देते हुए पूर्व भाजपा विधायक ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'त्योहार से पहले घर की सफाई के दौरान हमारे कर्मचारियों ने बेकार कागजात बाहर फेंककर जला दिए। अगर हमारा कोई गलत इरादा होता तो हम इन्हें घर के बाहर ही क्यों जलाते? इसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं है।'
कांग्रेस पार्टी के आरोप और SIT जांच
कांग्रेस का दावा है कि अलंद सीट पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला पहले ही पकड़ा गया, जिसकी वजह से कांग्रेस उम्मीदवार बी.आर. पाटिल ने चुनाव जीत लिया, और सुभाष गुट्टेदार हार गए। हालांकि मामले की जांच जारी है और एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, जले हुए वोटर रिकॉर्ड कहां से लाए गए थे? क्या ये आधिकारिक निर्वाचन दस्तावेज थे? इन्हें जलाने का उद्देश्य क्या था?