करतारपुर कॉरिडोर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी पाक आने का निमंत्रण भेजा था। यह कार्यक्रम 28 नवंबर को आयोजित होना है। इसके जवाब में सुषमा ने एक पत्र लिखकर कहा है कि वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगी। उनके स्थान पर भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
उनके इस फैसले पर केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा कि सुषमा जी के अपने कारण हैं जिस वजह से वह नहीं जा पाएंगी। इसका कारण चुनाव और उनकी सेहत ठीक न होना भी है। भारत चाहता है कि करतापुर कॉरिडोर का काम जल्द हो। भारत पाकिस्तान का सहयोग चाहता है। यह बात उन्होंने वाशिंगटन डीसी में कही।
सुषमा स्वराज के 2019 लोकसभा चुनाव न लड़ने के फैसले पर उन्होंने कहा कि वह एक वरिष्ठ और कुशल नेता हैं। सेहत से जुड़ा होने के कारण उनका ये निजी फैसला है। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि वह भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेंगी।
अखिलेश यादव के अयोध्या में सेना भेजे जाने के बयान पर वीके सिंह ने कहा, यहां पर्याप्त कानून व्यवस्था उपलब्ध है। मुझे पूरा यकीन है कि भाजपा की सरकार अन्य पार्टियों के मुकाबले, यह सुनिश्चित करेगी कि कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने कहा, "जब-जब भाजपा पावर में रही है, तब-तब डंडे और दूसरी चीजें नहीं हुई हैं। अखिलेश जी को विश्वास दिलाना चाहता हूं आराम से बैठिए।"
अंडमान में सेंटालिन जनजाति द्वारा अमेरिकी की हत्या मामले में वीके सिंह ने कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, इसलिए सरकार ने किसी के वहां न जाने की नीति बनाई थी। वह एक प्रथक समूह है, वह किसी बाहरी को नहीं चाहते कि वहां आए। यह बेहद दुखद घटना है। अंडमान प्रशासन यह पता लगा लेगा कि किसने उसे वहां जाने की इजाजत दी।
नवजोत सिंह सिद्धू के करतारपुर मामले में नाम आने और भाजपा नेताओं द्वारा उनकी आलोचना पर सिंह ने कहा, "करतारपुर कॉरिडोर बनाने की बहुत लोगों की मांग है न केवल नवजोत सिंह सिद्धू की। मैं भी डेरा नानक गया हूं तो मेरा भी नाम आना चाहिए। ऐसा नहीं है, ये समुदाय की मांग है, भारत सरकार ने सोच समझकर इसपर जोर दिया। अब हम चाहते हैं कि यह पूरा हो जाए। जो लोग सिद्धू की प्रशंसा करते हैं या आलोचान वो एक अलग मुद्दा है।"
वीके सिंह ने आगे कहा, "हमारे प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से ये साफ कर चुके हैं कि शांति के लिए वातावरण तैयार करना उनकी जिम्मेदारी है। यदि आप आतंकवाद की सहायता करते हैं तो बात करना मुमकिन नहीं है। हमने 4.5 साल तक इसका पालन किया। यह हमारी समान निती है, जिसका हमने पालन किया है।"