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बुरहान के हमदर्दों को वीके सिंह ने बताया देशद्रोही, पाकिस्तान को भी खरी-खोटी

Sun, 17 Jul 2016 03:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : file photo
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भारतीय सेना के पूर्व जनरल और मौजूदा वक्त में विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने फेसबुक के जरिए बुरहान वानी के समर्थकों, और पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है। उन्होंने वानी को 'शहीद' बताने वालों को देशद्रोहा करार दिया और कश्मीर को देश की आजादी के बाद से देश का अभिन्न हिस्सा बताया है। फेसबुक पर अपनी पूरी पोस्ट में वीके सिंह ने क्या लिखा, देखें-
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''कश्मीर की वर्तमान परिस्तिथि से आप परिचित होंगें ही। "शहीद" बुरहान वानी के लिए कुछ "बुद्धिजीवी शुभचिंतक" अविलम्ब अपना शोक व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने भारतीय सरकार एवं जम्मू कश्मीर की सरकार को कटघरे में खड़ा करके पूर्णतयः दोषी घोषित कर दिया है। उन्होंने यहां तक बोल दिया कि जनता की आवाज को बलपूर्वक दबाया जा रहा है। सेना और पुलिस सरकारी वेतनभोगी अत्याचारी हैं जिन्हें परपीड़ा में आनंद आता है। सीमा पार से भी जनता के विरोध को पुरजोर समर्थन मिल रहा है। अलगाववादी नेता निरन्तर विरोध के पक्ष में हैं।
 
दोस्तों, जब आतंकवादी, ईर्ष्यालु पड़ोसी, और देश में रह कर उसे ही तोड़ने वाले देशद्रोही एक सुर में राग अलापें, तो समझ लीजिए कि उनके खेमे में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बाकी आप खुद समझदार हैं। कुछ प्रश्न के उत्तर कश्मीर के लोगों को उनसे पूछने चाहिए जो उन्हें दंगों में जाने के लिए उकसाते हैं।''
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'भारतीय सेना के विरुद्ध युवाओं को उकसाने वाले हमारे 'शहीद' कैसे?'

- फोटो : file photo
गत वर्ष जब कश्मीर में बाढ़ आई थी, बुरहान वानी ने कितने कश्मीरियों को बचाया था? जिस भारतीय सेना ने डूबते हुए कश्मीर को एक नयी सांस दी थी, बुरहान वानी उसी भारतीय सेना के विरुद्ध हमलों के लिए युवाओं को उकसाता था। क्या ये हमारे शहीद हैं? भारतीय सेना ने उसे मार गिराया, और हमें गर्व है अपनी सेना पर। भगवान न करे कोई आपदा कश्मीर में आए, जिनपर पत्थर बरस रहे हैं, वही संकट मोचक बन कर सबसे आगे खड़े होंगें। इस विश्वास की पुष्टि मुझसे नहीं, किसी कश्मीरी से ही कर लीजिए।''

कुछ लोग कश्मीर की परिस्तिथि का ठीकरा भारत के सिर फोड़ते हैं, और यूएन कनवेंशन का हवाला देते हुए कहते हैं कि भारत ने अभी तक कश्मीरियों से मताधिकार क्यों नहीं करवाया। 

आप सबको शायद यह जान कर आश्चर्य हो, भारत चाह कर भी कश्मीर को लेकर जन मत नहीं ले सकता, क्योंकि यूएन कनवेंशन के अनुसार जन मत के लिए पाकिस्तान द्वारा गुलाम बनाए कश्मीर से अपनी सेना हटाना पहला चरण है। इस बारे में कश्मीरियों को कौन गुमराह कर रहा है, और क्यों? भारत की ओर जो क्रोध उड़ेला जा रहा है, उसे सही दिशा देना चाहिए।
 
दुख है कि जहां कश्मीर का एक युवा सिविल सर्विसेज में सर्वोच्च स्थान से उत्तीर्ण होता है तो वहीं दूसरा युवा हाथ में पत्थर उठा लेता है। युवाओं को यह निर्णय लेना पड़ेगा कि कौन से विकल्प से वो कश्मीर को बेहतर बना सकते हैं।''
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'कश्मीर हमारा था, हमारा है, हमारा ही रहेगा'

- फोटो : facebook screen shot
''कश्मीर तो हमारा ही रहेगा। 1947 से इस विचार में कोई परिवर्तन नहीं आया, और न ही आएगा। 2004 में हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत की सीमाएं परिवर्तित नहीं होंगी, आवत जावत के लिए सुविधा अवश्य दी जा सकती है। इस तथ्य को जितनी शीघ्रतापूर्वक स्वीकार करेंगे, उतना सभी के लिए अच्छा होगा।
 
हमारी सहायता करिए, कि हम आपकी सहायता कर सकें। सम्पूर्ण विश्व भारत का लोहा मान रहा है, और जानता है कि भविष्य में भारत का अति विशेष स्थान है। 

क्या आप इस महागाथा का भाग बनेंगें? मेरी विनती है, भीड़ से निकलिए, अपना भविष्य स्वयं निर्धारित करिए।''
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