विश्वभारती विश्वविद्यालय और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बीच चल रहा भूमि विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्वभारती के कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती ने कहा है कि विश्वविद्यालय अमर्त्य सेन से भूमि को वापस लेने के लिए कानूनी रूप से कदम उठाएगा। पत्र में उन्होंने कहा कि भूमि के अतिक्रमण का समर्थन नहीं किया जा सकता है और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
अपनी याचिका में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने तर्क दिया कि अक्तूबर 1943 में, तत्कालीन विश्व-भारती महासचिव रतींद्रनाथ टैगोर ने उनके पिता आशुतोष सेन को 99 साल के पट्टे पर 1.38 एकड़ जमीन दी थी, जिन्होंने बाद में उस पर 'प्रतिची' उनका निवास स्थान का निर्माण किया। सेन ने पहले बेदखली नोटिस के खिलाफ सूरी में एक अदालत का रुख किया था, लेकिन अदालत ने सुनवाई की तारीख 15 मई निर्धारित की, जो विश्वविद्यालय की जमीन खाली करने की समय सीमा के काफी बाद आया।
बता दें कि 1921 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित, विश्वभारती पश्चिम बंगाल का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय है, और प्रधानमंत्री इसके कुलाधिपति हैं।