ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन का मानना है कि पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) स्पर्धाओं में भारत के खिताबी सूखे का कारण खिलाड़ियों की मानसिकता है क्योंकि उनके लिए कौशल कभी मुद्दा नहीं रहा है।
इस महान खिलाड़ी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल के लिए भारतीय खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे मैच के परिणाम को सोचे बिना मैदान पर उतरे। भारतीय टीम ने अपना पिछला आईसीसी खिताब 2013 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी में जीता था। टीम इसके बाद नॉकआउट मैचों के दबाव को झेलने में विफल रही।
भारत को 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान से हार का सामना करना पड़ा। टीम 2019 विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड और फिर पिछले साल टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड की चुनौती से पार पाने में विफल रही। दो साल पहले डब्ल्यूटीसी के शुरुआती फाइनल में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।
हेडन ने कहा- इस मामले में निश्चित रूप से आप उनके कौशल पर सवाल नहीं उठा सकते। यह सिर्फ अवसर और मानसिकता का सवाल होना चाहिए। मेरा मतलब है भारत में क्रिकेट जीवन का हिस्सा है, यह खेलों का डीएनए है और लोकप्रियता के मामले में कोई इसके आस-पास नहीं है।
हेडन ने कहा कि भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता बेजोड़ है और इसी वजह से खिलाड़ियों पर चारों ओर अधिक दबाव बनता है। उन्होंने कहा, ‘ ऑस्ट्रेलिया में मैं अपनी इस दाढ़ी और टोपी के साथ सड़क पर आराम से चल सकता हूं। वहां मुझे ज्यादा लोग नहीं पहचानेंगे क्योंकि वहां लोकप्रियता के मामले में क्रिकेट को कई अन्य खेलों से चुनौती मिलती है। हमारे यहां रग्बी, फुटबॉल, वाटर स्पोर्ट्स, सर्फिंग और बहुत सारे आउटडोर खेल है। भारत में क्रिकेट के आस-पास कोई नहीं है इसलिए खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव होता है।
उन्होंने कहा, ‘ ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को मैं यही सलाह देना चाहूंगा कि मैच के परिणाम को सोचे बिना अपनी प्रक्रिया पर ध्यान दे।’ इस पूर्व आक्रामक बल्लेबाज ने कहा कि अगर यह मुकाबला लॉर्ड्स मैदान पर होता तो ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी होता लेकिन ओवल मैदान पर दोनों टीमों के पास बराबर मौका होगा।
उन्होंने कहा, ‘टेस्ट चैंपियनशिप के आयोजन से टेस्ट क्रिकेट का महत्व बढ़ा है। आपके पास फाइनल में दो महान टीमें है। ओवल का मैदान ऐसा नहीं है जो किसी टीम विशेष के लिए अधिक मददगार हो। यह इंग्लैंड की सबसे उछालभरी और सपाट सतह है। यह स्पिनरों और वास्तव में तेज गेंदबाजों के लिए भी ज्यादा मददगार नहीं है। यह तटस्थ स्थल की तरह है। यह अगर लॉर्ड्स में होता, तो ऑस्ट्रेलिया को वहां काफी फायदा होता।’