पी-8आई विमान को हिंद महासागर क्षेत्र का संरक्षक के तौर पर माना जाता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिए इस विमान ने पिछले 10 सालों में 44,000 घंटों से भी अधिक उड़ान भरी।
भारतीय नौसेना ने हवाई अड्डे आईएनएस राजली से पी-8आई एंटी सबमरीन वॉरफेयर और समुद्र निगरानी विमान की झलक दिखाई है। पी-8आई को भारतीय नौसेना का खेल बदलने वाला विमान भी कहा जाता है। इस विमान ने लद्दाख सेक्टर में ऊंचाई वाले क्षेत्रों से भारतीय के विभिन्न इलाकों में निगरानी रखने में अहम भूमिका निभाई है।
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इतना ही नहीं बल्कि डोकलाम संकट के दौरान सिक्किम-भूटान सेक्टर के साथ चीनी निर्माण का खुलासा करने के साथ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में विदेशी युद्धपोतों और अनुसंधान जहाजों की लगातार निगरानी भी की। इस विमान को हिंद महासागर क्षेत्र का संरक्षक के तौर पर माना जाता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिए इस विमान ने पिछले 10 सालों में 44,000 घंटों से भी अधिक उड़ान भरी। भारतीय नौसेना मौजुदा समय में 12 विमानों का संचालन करती है और भविष्य में अमेरिका से छह और विमान प्राप्त करने की भी योजना बना रही है।
आईएनएस राजली नौसैनिक हवाई अड्डे पर आईएनएस 312 स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर कैप्टन अजितेंद्र कांत सिंह ने कहा, 'ऐसी कोई भी संभावना नहीं है कि कोई भी जहाज या पनडुब्बी हिंद महासागर क्षेत्र से 312 स्क्वाड्रन के बिना गुजरेगी। इसके बारे में पता नहीं था।'
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कमांडर जिश्नु माधवन ने बताया, 'पी-81 विमान भारतीय नौसेना की आंख और कान बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विमान कई महत्वपूर्ण समुद्री अभियानों को अंजाम देता है, जिससे भारतीय समुद्री योद्धाओं को रणनीतिक रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़त मिलती है।' उन्होंने इस विमान की तारीफ करते हुए इसे खेल बदलने वाला विमान समुद्री निगरानी के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बताया है।