किसानों के ट्रैक्टर मार्च और लाल किला पर झंडा फहराने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली है। लुधियाना के डा. अरुण धवन के पास लंदन से उनके रिश्तेदारों के फोन आए और उन्होंने किसान आंदोलन, दिल्ली की स्थिति के बारे में जानकारी ली। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी माना कि किसानों का ट्रैक्टर मार्च अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बनेगा। बताते चलें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो पहले ही दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का समर्थन कर चुके हैं।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन गणतंत्र दिवस पर भारत का मेहमान बनने की रजामंदी दे चुके थे। हालांकि वह बाद में कोविड-19 की दूरी लहर का हवाला देकर नहीं आ सके, लेकिन किसान संगठनों ने उनसे भारत का दौरा न करने की अपील की थी। ब्रिटेन के कई सांसदों ने दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। बताते हैं आस्ट्रेलिया में भी बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं। उनके बीच में भी किसान आंदोलन चर्चा का विषय बना था।
इससे जगहंसाई ही होगी
विदेश सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी का कहना है कि किसानों के प्रदर्शन, लाल किला पर किसान संगठन और निशान साहिब का झंडा फहराने जैसी घटना से जग हंसाई ही होगी। वह कहते हैं कि यह देश के सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक क्षमता पर भी बड़ा सवाल है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार भी कहते हैं कि इससे दुनिया में कोई अच्छा संदेश नहीं गया। इससे बाहर के देशों में हमारी कमजोरी ही जाहिर होती है। वह कहते हैं कि झंडा लाल किला पर फहराया गया है, जहां से भारत अपना स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाता है।