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अब गांवों का बदलेगा नक्शा : कृषि ऋण समितियों को पेट्रो उत्पाद बेचने अस्पताल-स्कूल चलाने की मिलेगी छूट, राज्यों से 19 तक मांगे सुझाव

Tue, 05 Jul 2022 05:58 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

पैक्स के उप नियमों में बदलाव के अलावा केंद्र सरकार देश में नई सहकारिता नीति लाने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा एक सहकारिता विश्वविद्यालय शुरू करने और इस क्षेत्र के लिए पूरा डाटाबेस तैयार करने की भी योजना है।
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के जरिये गांवों का नक्शा बदलने की तैयारी की है। इसके तहत पैक्स को पेट्रोलियम उत्पादों की डीलरशिप और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें चलाने के साथ-साथ अस्पताल, स्कूल खोलने समेत कई क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इनके साथ पैक्स अपनी नियमित गतिविधियां भी चलाएंगे।

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सहकारिता मंत्रालय ने पैक्स के वर्तमान उपनियमों में बदलाव के लिए आदर्श मसौदा जारी किया है। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 100वें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर सोमवार को आयोजित सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, राज्य सरकारों से सुझाव मांगे गए हैं, क्योंकि समितियां  राज्यों के दायरे में आती हैं। राज्य सरकारों व अन्य हितधारकों को 19 जुलाई तक सुझाव देने हैं।

वर्तमान उपनियम इन समितियों को मुख्य कार्य से इतर कोई गतिविधि चलाने की अनुमति नहीं देते हैं। मसौदे के अनुसार, समिति का लक्ष्य इसके सदस्यों को लघु एवं मध्यम अवधि में समयबद्ध और पर्याप्त कर्ज उपलब्ध करना है। कर्ज का इस्तेमाल कृषि संबंधी विकास, सेहत संबंधी जरूरतों में किया जा सकता है।
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विकास गतिविधियों पर फोकस

  • मसौदे के अनुसार, पैक्स को समुदाय आधारित सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और पर्यावरण के साथ टिकाऊ विकास गतिविधियों की अनुमति होगी।
  • आधारभूत संरचना विकास, सामुदायिक केंद्र, अनाज खरीद, गांवों में अन्य सरकारी योजनाओं, एलपीजी/पेट्रोल/डीजल/हरित ऊर्जा की डीलरशिप या एजेंसी, खेती या घरेलू उपकरण, दक्षता विकास के क्षेत्रों में काम करने की अनुमति होगी।
  • इनसे प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) और  सदस्यों की आय व सुविधाओं में इजाफा होगा।

कंप्यूटरीकरण से आएगी पारदर्शिता
पैक्स के कंप्यूटरीकरण से समितियों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। बही-खाते दुरुस्त रखने में भी मदद मिलेगी। अभी देश के अधिकांश पैक्स डिजिटल नहीं हुए हैं। -अमित शाह, केंद्रीय सहकारिता मंत्री

मछली पालन, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी कर सकेंगे काम
प्रस्ताव के अनुसार, पैक्स को बैंक मित्र, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), कोल्ड स्टोरेज और गोदाम सुविधा आरंभ करने, राशन की दुकान शुरू करने, डेयरी, मछली पालन, सिंचाई और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम की अनुमति होगी।
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13 करोड़ किसान हैं पैक्स के सदस्य
  • पैक्स देश में त्रिस्तरीय अल्पावधि सहकारिता ऋण संस्थाओं में सबसे निचले स्तर की संस्थाएं हैं।
  • अभी 63,000 पैक्स हैं। देश के 13 करोड़ किसान इनके सदस्य हैं।
  • केंद्र ने गांवों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए 2025 तक पूरे देश में 3 लाख पैक्स शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।

63,000 पैक्स का होगा कंप्यूटरीकरण
2,516 करोड़ रुपये हो चुके हैं आवंटित
केंद्र सरकार की घोषणा के मुताबिक इस बजट से अगले 5 वर्ष में देशभर के पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा।

नई सहकारिता नीति आएगी
पैक्स के उप नियमों में बदलाव के अलावा केंद्र सरकार देश में नई सहकारिता नीति लाने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा एक सहकारिता विश्वविद्यालय शुरू करने और इस क्षेत्र के लिए पूरा डाटाबेस तैयार करने की भी योजना है।
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