कंप्यूटरीकरण से आएगी पारदर्शिता
पैक्स के कंप्यूटरीकरण से समितियों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। बही-खाते दुरुस्त रखने में भी मदद मिलेगी। अभी देश के अधिकांश पैक्स डिजिटल नहीं हुए हैं। -अमित शाह, केंद्रीय सहकारिता मंत्री
मछली पालन, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी कर सकेंगे काम
प्रस्ताव के अनुसार, पैक्स को बैंक मित्र, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), कोल्ड स्टोरेज और गोदाम सुविधा आरंभ करने, राशन की दुकान शुरू करने, डेयरी, मछली पालन, सिंचाई और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम की अनुमति होगी।
13 करोड़ किसान हैं पैक्स के सदस्य
- पैक्स देश में त्रिस्तरीय अल्पावधि सहकारिता ऋण संस्थाओं में सबसे निचले स्तर की संस्थाएं हैं।
- अभी 63,000 पैक्स हैं। देश के 13 करोड़ किसान इनके सदस्य हैं।
- केंद्र ने गांवों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए 2025 तक पूरे देश में 3 लाख पैक्स शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।
63,000 पैक्स का होगा कंप्यूटरीकरण
2,516 करोड़ रुपये हो चुके हैं आवंटित
केंद्र सरकार की घोषणा के मुताबिक इस बजट से अगले 5 वर्ष में देशभर के पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा।
नई सहकारिता नीति आएगी
पैक्स के उप नियमों में बदलाव के अलावा केंद्र सरकार देश में नई सहकारिता नीति लाने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा एक सहकारिता विश्वविद्यालय शुरू करने और इस क्षेत्र के लिए पूरा डाटाबेस तैयार करने की भी योजना है।