Family Members of legendary freedom fighter Bhagat Singh at Singhu Border
- फोटो : Amar Ujala
केंद्र सरकार और लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसान संगठन अब भगवान श्री कृष्ण और भगवान विष्णु का सहारा ले रहे है। गांव में होने वाली भागवत कथा और सत्यानारायण की कथाओं के आयोजन में किसान नेता पहुंचने लगे हैं। इनके जरिए वे कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान को लोगों बता रहे हैं।
किसान संगठनों ने अपने इस अनूठे विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के गांवों से की है। राज्य के जिस भी जिलों के गांवों में भागवत कथा का आयोजन होने जा रहा है, वहां किसान नेता पहुंचेंगे। भागवत कथा के पहले और बाद में वे कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान को छोटे किसानों को समझाएंगे। इसके अलावा वे लोगों से आंदोलन से जुड़ने की अपील भी करेंगे।
किसान संगठनों के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 26 फरवरी को आ रही है। गांव में लोगों के घरों में इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन होता है। इसमें आसपास के लोग शामिल होते हैं। इसलिए किसान संगठन के लोग भी ऐसे आयोजन में शामिल होगे और कथा के बाद किसानों को कृषि कानूनों के नुकसान को बताएंगे।
मध्यप्रदेश के युवा किसान नेता राहुल राज ने अमर उजाला से कहा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के गांवों में युवा किसान द्वारा नई पहल की जा रही है। वे सामाजिक और धार्मिक आयोजन में पहुंचकर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए हम भी अपनी बात अच्छे मन और अच्छे वातावरण में किसानों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का 92वां दिन है। किसान बुधवार को पूरे देश में 'दमन विरोधी दिवस' मना रहे हैं। इसमें किसान आंदोलन पर हो रहे चौतरफा दमन का विरोध किया जा रहा है। किसान संगठनों ने सभी तहसील और जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिए।
वहीं सभी किसानों ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों का सम्मान किया जाए और उनके खिलाफ कोई 'दमनकारी कार्रवाई' नहीं की जाए। वहीं मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर किसानों द्वारा 'पगड़ी संभाल दिवस' मनाया गया था।