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शपथ लेते ही विवादों में विजय सरकार: राज्य गान से पहले वंदे मातरम् बजाने पर CPI ने जताई आपत्ति, उठाए कई सवाल

Sun, 10 May 2026 04:35 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ सी विजय के शपथ ग्रहण समारोह में गानों के क्रम पर विवाद हो गया है। सीपीआई ने सरकारी कार्यक्रम में वंदे मातरम को पहले और राज्य गान तमिल थाई वजथु को तीसरे स्थान पर बजाने पर कड़ी आपत्ति जताई। सीपीआई नेता वीरपांडियन ने इसे परंपरा का उल्लंघन बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं...
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विजय के शपथ ग्रहण समारोह। - फोटो : PTI
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विस्तार
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तमिलनाडु में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत के साथ ही एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। राज्य के नए मुख्यमंत्री जोसेफ सी विजय के शपथ ग्रहण समारोह में गानों के बजने के क्रम को लेकर भारी राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने इस सरकारी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को 'तमिल थाई वजथु' (तमिल राज्य गीत) से पहले बजाए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सीपीआई का साफ कहना है कि किसी भी सरकारी समारोह में सबसे पहला स्थान राज्य के गीत को ही मिलना चाहिए और यह तमिलनाडु की पुरानी परंपरा का खुला अपमान है।
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दरअसल, रविवार को चेन्नई में टीवीके प्रमुख जोसेफ सी विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विवाद तब शुरू हुआ जब इस शपथ ग्रहण समारोह में गानों का क्रम तय किया गया। समारोह की शुरुआत में सबसे पहले 'वंदे मातरम' बजाया गया। इसके बाद देश का राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया गया और सबसे अंत में तीसरे नंबर पर तमिलनाडु का राज्य गान 'तमिल थाई वजथु' बजाया गया। इसी क्रम को लेकर सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने नाराजगी जताते हुए इसे राज्य की स्थापित परंपराओं के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि सरकारी कार्यक्रम हमेशा 'तमिल थाई वजथु' से शुरू होते हैं और राष्ट्रगान के साथ खत्म होते हैं।

'वंदे मातरम' पर सीपीआई ने क्या सवाल उठाया?
इस विवाद में 'वंदे मातरम' को लेकर भी सीपीआई ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सीपीआई नेता वीरपांडियन ने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह तय हो गया था कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगान के रूप में काम नहीं कर सकता है। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया है कि यह गीत एक विशिष्ट देवता को समर्पित है और इसका स्वरूप कुछ हद तक सांप्रदायिक और धार्मिक है। इसलिए, राज्य के सबसे बड़े सरकारी समारोह में इसे पहली जगह देना और राज्य गान को तीसरे नंबर पर धकेलना पूरी तरह से गलत है। यह कदम राज्य की सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
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बदलाव के पीछे किसका निर्देश?
इस पूरे मामले में राजभवन यानी लोक भवन की भूमिका पर भी सीधे तौर पर निशाना साधा गया है। सीपीआई ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह के एजेंडे में बदलाव जानबूझकर किया गया है। वीरपांडियन का कहना है कि लोक भवन के कथित निर्देशों के तहत ही 'वंदे मातरम' को प्राथमिक स्थान दिया गया और तमिल वंदना को तीसरे स्थान पर रखा गया है। यह पूरी तरह से राज्य की स्थापित परंपरा का खुला उल्लंघन है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
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सीपीआई ने विजय सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
विवाद के बाद सीपीआई ने नई सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। वीरपांडियन ने कहा है कि तमिलनाडु सरकार को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए और बताना चाहिए कि इस बड़ी गलती के लिए कौन जिम्मेदार है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि समारोह में भागीदार होने के नाते टीवीके को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'तमिल थाई वजथु' को उसका सही और सम्मानजनक स्थान वापस मिले। आगे से ऐसी गलती बिल्कुल नहीं दोहराई जानी चाहिए।


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