भारत और वियतनाम के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वियतनाम के विदेश मंत्री बुई थान्ह सोन ने हिस्सा लिया।
इस दौरान वियतनाम के विदेश मंत्री बुई थान्ह सोन ने कहा कि भारत एक महान देश है, जो दुनिया की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध सभ्यताओं में से एक है। हजारों साल पहले भारत से व्यापारी और पर्यटक वियतनाम गए और भारत की संस्कृति वियतनाम पहुंची, इसी तरह पूरे दक्षिण एशिया में भारत की संस्कृति फैली है।
उन्होंने कहा कि साल 1972 में राजनयिक संबंधों की शुरुआत से ही भारत ने वियतनाम की स्वतंत्रता में सहयोग, राष्ट्रीय एकीकरण में सहायता और देश के पुनर्निर्माण में सहायता की है।
वहीं इस मौके पर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि का हमारा विजन देशों के बीच गहन और बढ़ते संबंधों का आधार है। आज वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल हमारा (भारत-वियतनाम) द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 14 बिलियन डॉलर को पार कर गया। यह दर्शाता है कि हम व्यापार में एक-दूसरे को अधिक उम्मीद और दिलचस्पी के साथ देख रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल हम 15 बिलियन डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने मलेशियाई समकक्ष सैफुद्दीन अब्दुल्ला से मुलाकात की। दोनों ने राजनयिक संबंध, राजनीतिक, आर्थिक और वाणिज्यिक, रक्षा, ऊर्जा, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के विस्तार पर चर्चा की।