विरोधी राजनीतिक दलों में आपसी मेलजोल बढ़ाने की अपील करते हुए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्हें एक-दूसरे के साथ प्रतिद्वंद्वियों के रूप में व्यवहार करना चाहिए न कि दुश्मनों जैसा। उन्होंने कहा कि "एक दूसरे के बगल में बैठने से कोई आपको परिवर्तित नहीं कर देगा"। नायडू ने कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की किताब "स्ट्रेट टॉक" का विमोचन किया। समारोह में उन्होंने कहा, "राजनीतिक दल प्रतिद्वंद्वी हैं कोई दुश्मन नहीं। उनके विचार और विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी देश के लिए कुछ बढ़िया करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हमें उनके साथ प्रतिद्वंद्वियों जैसा व्यवहार करना चाहिए न कि दुश्मनों के जैसा।"
नायडू की टिप्पणी को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के 7 जून को आरएसएस मुख्यालय के समारोह में शामिल होने के फैसले से पैदा हुए विवाद से जोड़ कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, लोकसभा में कांग्रेस मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया, द्रमुक की कनिमोझी और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी भी मौजूद थे। राज्यसभा की कार्यवाही में लगातार पड़ रही बाधाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए, उच्च सदन के अध्यक्ष नायडू ने कहा कि सदन की कार्यवाही के नियमों की समीक्षा करने वाली एक समिति अगले महीने अपनी रिपोर्ट जमा करेगी।
सिंघवी की पुस्तक से उनके सुझावों का जिक्र करते हुए कि सदन की कार्यवाही में बाधा डालने वाले सदस्यों को स्वत निलंबित कर दिया जाना चाहिए, नायडू ने उम्मीद जताई कि समिति वरिष्ठ वकील के विचार पर गौर करेगी। उन्होंने कहा, "मैंने सदन की सुचारु कार्यप्रणाली को सक्षम बनाने के लिए राज्यसभा की प्रक्रिया और कार्यवाही के नियमों की समीक्षा और पुनरीक्षण करने के लिए एक समिति की स्थापना की है।
इस समिति ने काम शुरू कर दिया है और अंतरिम रिपोर्ट अगले महीने जमा होने की संभावना है।" बजट सत्र के दौरान उच्च सदन की ज्यादातर कार्यवाही बाधित रहने के बाद समिति का गठन किया गया था।