उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शपथ ग्रहण के बाद राज्यसभा के पदेन सभापति की कुर्सी मानसून सत्र के अंतिम दिन संभाल ली। विपक्ष की ओर से स्वागत भाषण में उठी आशंकाओं पर उन्होंने स्पष्ट किया वह किसी एक पार्टी के नहीं सभी पार्टियों के हैं।
उन्होंने निष्पक्षता के साथ सदन की परंपराओं, समय प्रबंधन और कार्य पद्धति में गुणात्मक सुधार का भी आश्वासन दिया। वेंकैया ने कहा कि ये उनके दिल की बातें हैं। वेंकैया ने कहा कि मैं पहली बार 1958 में सदन आया था तो कल्पना नहीं की थी।
लोकतंत्र का चमत्कार है मेरे जैसे आम आदमी पर भी ये जिम्मेदारी डाल सकती है। मुझे गर्व है कि मैं किसान का बेटा और खेतिहर हूं। मैं राजनीति से ऊपर उठकर काम करूंगा। मैं किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं हूं मैं सभी पार्टी का हूं। वेंकैया ने कहा कि मैं नहीं मानता कि विपक्ष की भूमिका नहीं है।
सरकार की ओर से विधेयक आए विपक्ष उस पर चर्चा करे बहस करे और विधेयक पारित हो। शोरगुल में विधेयक पास कराने की स्थिति नहीं आएगी। विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए स्वतंत्र है तो सरकारी कामकाज भी जरूरी है। हम दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं इस भूमिका को ध्यान में रखकर समता और समानता साथ चलना होगा। ।
मीडिया संवेदनशील बने
वैंकेया नायडू बतौर सभापति चाहते हैं कि सदन में होने वाले गंभीर विषयों की कवरेज मीडिया जरूर दिखाए। उन्होंने कहा कि मीडिया स्वतंत्र है मैं निर्देश नहीं दे सकता न ही सलाह देना चाहता हूं लेकिन मीडिया में केवल सनसनीखेज, नकारात्मक और ड्रामेबाजी वाली खबरों को अधिक महत्व मिलता है। बतौर नए सदस्य में मैंने बड़ी तैयारी के साथ इसी सदन में कृषि पर 57 मिनट बोला लेकिन अगले दिन समाचारपत्रों को देखा तो निराशा हुई खबर पूरी तरह से गायब थी।