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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू बोले: राज्यपालों के संबोधन के दौरान हो रहीं कुछ घटनाएं बिल्कुल नहीं होनी चाहिए

Fri, 04 Mar 2022 05:00 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी

सार

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी को यह देखना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में गरिमा, मानक और नैतिकता बनी रहे।
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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू - फोटो : twitter/VPSecretariat
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विस्तार
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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि राज्यपालों के संबोधन के दौरान हो रहीं कुछ घटनाएं और कुछ संस्थानों में हो रही हिंसा से पूरी तरह बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं और लोगों में भ्रम की स्थिति को जन्म देती हैं। 

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वह गोवा में राजभवन में दरबार हॉल के उद्घाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। यहां राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लै, केंद्रीय मंत्री श्रीपद नायक, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत व अन्य मौजूद थे। उन्होंने कहा, संसद सबसे ऊपर है, हमें ऐसे संस्थानों का सम्मान करना चाहिए।

नायडू ने कहा कि लोकतंत्र में अगर आप सरकार को पसंद नहीं करते हैं तो आप धैर्य और शांति के साथ आंदोलन कर सकते हैं और चुनाव का इंतजार कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से जनादेश का सम्मान करने और हिंसा से बचने का अनुरोध किया। 
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महाराष्ट्र में राज्यपाल कोश्यारी नहीं पूरा कर पाए थे संबोधन
उनका यह बयान महाराष्ट्र विधानसभा की घटना के एक दिन बाद आया है। गुरुवार को विधानसभा में दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के दौरान विधायकों की नारेबाजी के चलते राज्यपाल भगत सिंह कोश्यानी संबोधन पूरा किए बिना ही विधान भवन के सेंट्रल हॉल से चले गए थे।

गुजरात में भी राज्यपाल देवव्रत के सामने भी आए थे अवरोध
बुधवार को, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को भी बजट सत्र के पहले दिन राज्य विधानसभा में अपना परंपरागत संबोधन जल्दी खत्म करना पड़ा था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि कांग्रेस पार्टी के के विधायक विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा विरोधी नारेबाजी कर रहे थे। 

वेंकैया नायडू ने कहा कि हम संसद के दोनों सदनों में, लोकसभा और राज्यसभा, कुछ तय घटनाएं होते देख रहे हैं। ऐसी घटनाएं राज्यपालों के संबोधन के दौरान हो रही हैं और विभिन्न संस्थानों में हो रही हिंसा से भी पूरी तरह से बचना चाहिए। इससे लोकतंत्र कमजोर होता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, 'लोकतंत्र में, अगर आपको संबोधन पसंद नहीं आता है तो आप इसके पूरा होने के बाद आलोचना कर सकते हैं। अगर आपको बजट अच्छा नहीं लगता तो आप आलोचना कर सकते हैं। अगर आपको सरकार पसंद नहीं है तो आपको धैर्य के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहिए और चुनाव का इंतजार करना चाहिए। आपके अंदर जनादेश का सम्मान करने के लिए धैर्य होना चाहिए।'

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