उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को सेवानिवृत्त नौकरशाहों से आग्रह किया कि वे देश के संवैधानिक संस्थानों की छवि को धूमिल करने वाले 'झूठे और भारत विरोधी विमर्श' का मुकाबला करने के लिए अपनी क्षमता का इस्तेमाल करें।
धनखड़ ने नई दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि लोकतांत्रिक शासन की अपनी अनूठी चुनौतियां हैं। उन्होंने सिविल सेवकों से कानून के शासन और संविधान के प्रति अटूट व दृढ़ प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, 'देश के कुछ हिस्सों में सत्तारूढ़ दल के साथ अधिकारियों के राजनीतिक झुकाव से संघवाद की सीमा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को प्रणालीगत ध्यान देने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेवानिवृत्त नौकरशाह भारत के संवैधानिक संस्थानों और लोकतांत्रिक मूल्यों को अनुचित रूप से कलंकित करने और कलंकित करने की कोशिश कर रहे झूठे और राष्ट्र विरोधी आख्यानों को बेअसर करने में "प्रतिष्ठित रूप से तैनात" हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण में सेवानिवृत्त सिविल सेवकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ''वे प्रतिभा, अनुभव का भंडार हैं और जानते हैं कि देश के लिए सबसे अच्छा क्या है। वे हमेशा मजबूत स्थिति से झूठे आख्यानों का विश्लेषण करके अपने मन की बात कहते हैं।" उपराष्ट्रपति ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटलीकरण, नवाचार और उद्यमिता पर ध्यान देने के साथ भारत के शासन मॉडल पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।