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Navy: वाइस एडमिरल तरुण सोबती बने नौसेना उप-प्रमुख, इन्हीं के नेतृत्व में विकसित किया जा रहा करवार नेवल बेस

Sun, 01 Oct 2023 02:35 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तरुण सोबती नौसेना में स्टाफ रिक्वायरमेंट और डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल जैसे अहम विभागों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वाइस एडमिरल सोबती मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में भी नेवल अधिकारी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 
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वाइस एडमिरल तरुण सोबती (दाएं) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने रविवार को भारतीय नौसेना के उप-प्रमुख का पद संभाल लिया। वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने वाइस एडमिरल संजय महेंद्रू की जगह ली है, जो 38 साल की शानदार सेवा के बाद रिटायर हुए। वाइस एडमिरल संजय महेंद्रू के कार्यकाल के दौरान भारतीय नौसेना ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की और भारतीय नौसेना की समुद्री पहुंच और परिचालन क्षमताओं में इजाफा हुआ। ऐसे में वाइस एडमिरल तरुण सोबती पर संजय महेंद्रू की उपलब्धियों को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। 
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नौसेना में कई अहम पदों पर सेवाएं दे चुके हैं वाइस एडमिरल तरुण सोबती
वाइस एडमिरल तरुण सोबती को एक जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वह नौसेना में नेवीगेशन और दिशा-निर्देश के विशेषज्ञ माने जाते हैं। अपने 35 साल के करियर में वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने नौसेना में कई अहम पदों पर सेवाएं दी हैं। तरुण सोबती आईएनएस निशंक, आईएनएस कोरा और आईएनएस कोलकाता को कमांड कर चुके हैं। साथ ही वह नौसेना में स्टाफ रिक्वायरमेंट और डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल जैसे अहम विभागों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वाइस एडमिरल सोबती मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में भी नेवल अधिकारी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 

करवार नेवल बेस को विकसित करने में अहम भूमिका
साल 2019 में उनकी रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति हुई। नेवल एकेडमी, एझीमाला में वह डिप्टी कमांडेंट और चीफ इंस्ट्रक्टर की भी भूमिका निभा चुके हैं। साथ ही नौसेना की ईस्टर्न फ्लीट के कमांडिंग अफसर भी रह चुके हैं। साल 2021 में तरुण सोबती, वाइस एडमिरल बने और उन्होंने प्रोजेक्ट सीबर्ड के डायरेक्टर जनरल पद की जिम्मेदारी संभाली। उन्हीं के नेतृत्व में भारत करवार नेवल बेस को विकसित कर रहा है। वाइस एडमिरल तरुण सोबती को साल 2020 में विशिष्ठ सेवा मेडल और साल 2022 में अति विशिष्ठ सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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क्यों अहम है करवार नेवल बेस
कर्नाटक में अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच स्थित करवार में बनाया जा रहा करवार नेवल बेस ना सिर्फ भारत का बल्कि एशिया का सबसे बड़ा नौसैन्य अड्डा है। इस नेवल बेस को विकसित करने पर सरकार करीब तीन अरब डॉलर यानी 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 11 हजार एकड़ में फैले इस नेवल बेस में बंदरगाह, ब्रेकवाटर ड्रेजिंग, टाउनशिप, नौसेना अस्पताल, एक डॉकयार्ड अपलिफ्ट सेंटर और एक शिप लिफ्ट का निर्माण किया गया है। इस बेस के पहले चरण का काम हो चुका है और दूसरे चरण का काम 2025 तक पूरा होगा। दूसरे चरण का काम होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा नौसैन्य अड्डा होगा। यहां 30 से ज्यादा युद्धपोत और सबमरीन तैनात हो सकेंगी। यहा एक नेवल एयर स्टेशन भी बनाया जाएगा, जहां से फाइटर प्लेन उड़ान भर सकेंगे। यह अड्डा व्यापार और सैन्य दोनों मामले में अहम है और चीन और पाकिस्तान की चुनौती से निपटने में भी अहम साबित होगा। 
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