पीएम केयर्स फंड की राशि को महामारी के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) में हस्तांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस मांग का जमकर विरोध किया।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पीएम केयर्स फंड स्वैच्छिक फंड है जबकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ फंड बजट आवंटन के दायरे में हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक सार्वजनिक ट्रस्ट है जहां आप स्वैच्छिक योगदान कर सकते हैं। इसमें एनडीआरएफ या एसडीआरएफ के किसी बजटीय आवंटन को हाथ तक नहीं लगाया जा रहा। मेहता ने पीठ को बताया कि पीएम केयर्स फंड को जैसे और जहां खर्च करना होगा किया जाएगा। इसमें किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
वहीं याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल के और से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा, पीएम केयर्स फंड एक सांविधानिक फ्रौड है। इसका गठन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
एनडीआरएफ का ऑडिट सीएजी द्वारा होता है लेकिन सरकार कह रही है कि पीएम केयर्स फंड का ऑडिट प्राइवेट ऑडिटर द्वारा कराया जाएगा। बहरहाल दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।