उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि विश्व गुरु रहे भारत को फिर से अपने बौद्धिक नेतृत्व को हासिल करने की जरूरत है। एक बार फिर से सीखने और नवोन्मेष (इनोवेशन) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरना चाहिए। नायडू ने मंगलवार को अटल रैंकिंग ऑफ इंस्टीट्यूशंस ऑन इनोवेशन अचीवमेंट 2020 कार्यक्रम में कहा, नवोन्मेष हमेशा ही मानव की प्रगति का महत्वपूर्ण तत्व रहा है।
शून्य तथा दाशमिक प्रणाली के आविष्कार से लेकर नवोन्मेष तक का भारत में समृद्ध इतिहास रहा है। हमारे यहां काफी प्रतिभाशाली युवा हैं, जो नए विचारों से भरे हैं और उनमें नए पथ पर आगे बढ़ते हुए ऐसे विचारों को लागू करने का जुनून है। युवा हमारे देश के भविष्य को परिभाषित करेंगे । इन्हें प्रोत्साहन, सुविधा और मान्यता प्रदान करने की जरूरत है। उन्हें नये फलक की तलाश करने के लिये जरूरी मार्गदर्शन और स्वतंत्रता प्रदान किये जाने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, नवोन्मेष को जन आंदोलन बनाना समय की जरूरत है और इसके लिए छात्रों को लीक से हटकर सोचने वाला बनाने की जरूरत है। छात्रों में नवोन्मेष और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। नायडू ने कहा कि शिक्षा ऐसी हो कि छात्रों को रचनात्मक बनाए। उन्हें लीक से हट कर समाधान सोचना सिखाए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नवोन्मेष पर खास ध्यान दिया गया है।