कोरोना संक्रमण के कारण संसद का बजट सत्र 24 मार्च को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद देश चार चरणों में लॉकडाउन में रहा। अब चूंकि सरकार ने देश को अनलॉक करना शुरू कर दिया है, ऐसे में मानसून सत्र के लिए संसद के दरवाजे जल्द खुल सकते हैं।
सोमवार को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सत्र की तैयारियों पर चर्चा की। उन्होंने तकनीक के इस्तेमाल को लंबे समय तक विकल्प के तौर पर अपनाने पर जोर दिया। इसमें उन्होंने महामारी के कारण सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और वर्चुअल पार्लियामेंट याने ई-संसद की संभावना जैसे विषयों एवं विकल्पों के बारे में चर्चा की। उच्च और निचले सदन के अध्यक्षों ने इस बात को रेखांकित किया कि ऐसी स्थिति में जब नियमित बैठकें संभव नहीं हैं, तब संसद सत्र को सुगम बनाने के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने की जरूरत है।
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू के आवास पर सोमवार को आयोजित बैठक में दोनों सदनों के महासचिवों ने भी हिस्सा लिया। पीठासीन अधिकारियों ने महासचिवों को निर्देश दिया कि वे संसद के सेंट्रल हॉल का उपयोग करने की बात को भी ध्यान में रखें। बैठक में लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही एक-एक दिन छोड़कर संचालित करने का भी विकल्प रखा गया।
बैठक में दोनों महासचिवों ने सभापति और स्पीकर को संसद की विभिन्न समितियों की बैठक वर्चुअल तरीके से आयोजित करने से जुड़े विविध पहलुओं के बारे में जानकारी दी। नायडू और बिरला का विचार था कि आभासी बैठकें आयोजित करने के विषय को दोनों सदनों की नियमों से जुड़ी समिति को विचार के लिए भेजना जरूरी है। इनका मानना था कि चूंकि संसद की कार्यवाही का आम लोगों के लिए सीधा प्रसारण किया जाता है, ऐसे में गोपनीयता बनाए रखने की कोई ऐसी जरूरत नहीं है। ऐसे में लंबी अवधि में वर्चुअल पार्लियामेंट एक विकल्प हो सकता है।
अर्जेंटीना में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चल चुकी है संसद, यूके में भी विचार
15 मई को कोरोना प्रभावित अर्जेंटीना में पहली बार संसद की कार्यवाही वीसी के जरिए हुई थी। इसमें 72 में से 70 सांसद यानी 97% उपस्थित रहे थे। इसके लिए संसद की इमारत में दो बड़ी स्क्रीन लगाई गई। दो कनेक्शन लिए गए। पहली स्क्रीन भाषण और वोटिंग के लिए थी।
जबकि दूसरी स्क्रीन सांसदों के रजिस्ट्रेशन और उनकी पहचान प्रमाणित करने के लिए लगाई गई थी। सत्र के दौरान कुछ सांसद ही सदन में मौजूद थे। इन सभी ने भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया था। यूके में भी इस तर्ज पर संसद की संभावना पर विचार किया जा रहा है।