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लोक सभा में ओबीसी विधेयक को विभिन्न दलों का समर्थन, आरक्षण में क्रीमी लेयर हटाने की मांग भी उठी

Thu, 02 Aug 2018 04:40 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के प्रावधान वाले विधेयक का विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने समर्थन किया, साथ ही कुछ सदस्यों ने ओबीसी आरक्षण से सबंधित क्रीमी लेयर की व्यवस्था को खत्म करने की मांग की। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने ‘संविधान (एक सौ तेइसवां संशोधन) विधेयक-2017 को चर्चा और पारित कराने के लिए आज सदन में रखा और सदस्यों से इसका समर्थन करने की अपील की। चर्चा की शुरुआत करते हुए तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि ओबीसी को अधिकारों के संदर्भ में राज्यों ओर केंद्र के बीच सार्थक संवाद होना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान ओबीसी विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में गिरावट आई है और सरकार को इसमें बढ़ोतरी करनी चाहिए। बनर्जी ने एससी-एसटी कानून पर फैसला देने वाले न्यायाधीश को सेवानिवृत्ति के तत्काल के बाद एनजीटी का अध्यक्ष बना दिया गया। अन्नाद्रमुक एम चंद्रकाशी ने द्रविड़ आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु में सामाजिक न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग में देश के हर हिस्से को प्रतिनिधित्व दिये जाने का प्रयास होना चाहिए। बीजू जनता दल के वी. महताब ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि अच्छी बात है कि सरकार ने महिला सदस्य की उनकी मांग को मान लिया है।

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ओबीसी वर्गों के उन लोगों तक आरक्षण का फायदा पहुंचे जिनको अब तक नहीं मिला है। महताब ने कहा कि एक ही जाति के लोग अलग अलग राज्यों में भिन्न श्रेणियों में रखे गए हैं और इसे दुरुस्त किया जाना चाहिए। शिवसेना के अरविंद सावंत ने मराठा आरक्षण आंदोलन का मुद्दा उठाया और कहा कि तमिलनाडु की तरह आरक्षण की सीमा को 69 फीसदी करना चाहिए ताकि दूसरे वर्गों को फायदा मिल सके।
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तेलंगाना राष्ट्र समिति के बी एन गौड़ ने कहा कि यह दुख का विषय है कि ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने में 25 साल का समय लग गया। उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे आरक्षण का फायदा मिलने में लोगों को और परेशानी होगी। तेलुगू देसम पार्टी के राम मोहन नायडू ने भी क्रीमी लेयर को खत्म करने की मांग करते हुए कहा कि 27 फीसदी आरक्षण का पूर्णत: क्रियान्वयन होने के बाद ही ऐसा कोई कदम उठाया जाना चाहिए।

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