उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर जारी कानूनी जंग में जीत हासिल करने के लिए केंद्र सरकार राज्यपाल की रिपोर्ट को ही मुख्य हथियार बनाएगी। नैनीताल हाईकोर्ट के डबल बेंच के समक्ष 6 अप्रैल को पेश किए जाने हलफनामे में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्ष में राज्यपाल की रिपोर्ट के सहारे ही केंद्र अपना बचाव करेगा।
गौरतलब है कि राज्यपाल ने अपनी दूसरी और तीसरी रिपोर्ट में राज्य में राजनीतिक अस्थिरता, संवैधानिक संकट खड़ा होने के साथ-साथ विपक्ष और कांग्रेस के बागियों की ओर से मतविभाजन की मांग को ठुकराए जाने का जिक्र किया था।
बहरहाल हलफनामा तैयार करने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। हालांकि जिस प्रकार राज्य में राष्ट्रपति शासन के साथ-साथ कांग्रेस के बागियों की सदस्यता का मामला भी कानूनी दांवपेंच में बुरी तरह उलझ गया है, उससे राज्य में जारी राजनीतिक संकट का तत्काल हल निकलने की संभावना नहीं है।