उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ कई मोर्चों पर घेराबंदी शुरू हो गयी है। इसमें उनके ही अपने विधायकों की नाराजगी से लेकर उत्तराखंड में बनाए गए नए गैरसैंण मंडल की राजनीति और भाजपा की अंदरूनी कलह भी हावी है। चूंकि उत्तराखंड में अगले साल चुनाव हैं। इसलिए भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले चुनावों में किसी भी तरीके का कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री को बदलने का दबाव है, वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी बने रहने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
उत्तराखंड में अगर फेरबदल होता है, तो तीन बड़े नेताओं के नाम चर्चा में सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रबल दावेदारों में है। इसके अलावा सांसद अनिल बलूनी का नाम भी जोर शोर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर चल रहा है। तीसरा नाम उत्तराखंड सरकार में मंत्री और कद्दावर नेता सतपाल जी महाराज का भी नाम शामिल है।
हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है सतपाल महाराज को मुख्यमंत्री बनाए जाने की उम्मीद बहुत कम है। क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। चुनावी साल में भारतीय जनता पार्टी ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है जिससे उसका अपना मूल वोटर भटक कर इधर-उधर चला जाए।
उत्तराखंड क्रांतिदल के प्रवक्ता देवेंद्र कहते हैं कि गैरसैंण के नाम पर सरकार सिर्फ राजनीति कर रही है। सिर्फ कमिश्नरी बनाकर सरकार ने खानापूर्ति की है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि गैरसैंण के सत्र के नाम पर जन भावनाओं की अनेदखी का ऐसा निर्णय लिया गया है, जो धरातल पर उतरेगा भी या नहीं।