यूपी में महागठबंधन बनाम बीजेपी, किसकी चित किसकी पट?
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देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश। 80 लोकसभा सीट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्वाचन क्षेत्र यहीं हैं। कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है। इस बार भी यूपी ने भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया तो दिल्ली में उसकी बहुमत की सरकार बनेगी।
यूपी की सियासी अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2014 में मोदी को भाजपा ने पीएम पद का दावेदार बनाया तो उनके लिए वाराणसी सीट चुनी गई। इसी सीट से सांसद निर्वाचित होकर उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वर्ष 2014 में भाजपा को 80 में 71 सीटें मिली थीं। दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल ने जीती थीं। यूपी से इस विराट जानदेश ने ही दिल्ली में भाजपा को अकेले पूर्ण बहुमत हासिल करने का रास्ता साफ किया था। फिर सभी की नजरें यूपी पर हैं।
यूपी इसलिए भी खास हो गया है कि दो दशक बाद सपा-बसपा फिर एक साथ मैदान में हैं। सपा-बसपा-रालोद की तिकड़ी ने 78 सीटों पर चुनाव लड़ा। रायबरेली व अमेठी कांग्रेस के लिए छोड़ दी थी।
यूपी ने दिए हैं 9 प्रधानमंत्री
उत्तर प्रदेश की सियासी ताकत है कि उसने देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी तक कुल 8 प्रधानमंत्री दिए हैं। इसमें नेहरू व मोदी के अलावा लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर थे।