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यूपी चुनाव 2022 : सामाजिक न्याय बनाम हिंदुत्व की जंग नहीं चाहती भाजपा, ..इसलिए योगी को गोरखपुर से बनाया उम्मीदवार

Sun, 16 Jan 2022 05:41 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

पहले दो चरणों के लिए उम्मीदवार घोषित कर भाजपा ने संदेश दिया है कि क्षेत्र में गहरी नाराजगी झेल रहे विधायकों के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 107 उम्मीदवारों की पहली सूची में पार्टी ने 22 विधायकों के टिकट काटे हैं।
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गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आखिरकार सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए भाजपा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर नगर से चुनाव मैदान में उतारा। दरअसल पार्टी नहीं चाहती कि विधानसभा चुनाव हिंदुत्व बनाम सामाजिक न्याय हो जाए। विपक्ष की पूरी कोशिश विधानसभा चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा ओर हिंदुत्व बनाम सामाजिक न्याय की बनाने की है। इससे बचने के लिए योगी को अंतत: उनके गृह क्षेत्र गोरखपुर से उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।

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गौरतलब है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषण के बाद पार्टी में मची भगदड़ से भाजपा चिंतित है। पार्टी छोड़ कर जाने वाले नेता और मुख्य विपक्ष समाजवादी पार्टी भाजपा पर पिछड़ा विरोधी होने का लगातार आरोप लगा रहे हैं। सभी ने अपने इस्तीफेमें पिछड़ों-दलितों के साथ योगी कार्यकाल में अत्याचार होने और इनकी उपेक्षा होने का आरोप लगाया है। विपक्ष की रणनीति इसके जरिए पूरे चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा बनाने की है।

नाराजगी झेल रहे विधायकों पर नरमी नहीं
पहले दो चरणों के लिए उम्मीदवार घोषित कर भाजपा ने संदेश दिया है कि क्षेत्र में गहरी नाराजगी झेल रहे विधायकों के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 107 उम्मीदवारों की पहली सूची में पार्टी ने 22 विधायकों के टिकट काटे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सबसे अधिक टिकट पूर्वांचल में काटे जाएंगे। पूर्वांचल में ही कई विधायकों की सीटों में भी बदलाव किया जाएगा।

प्रचार पर हिंदुत्व के हावी होने का था डर
दरअसल लोकसभा के बीते दो और विधानसभा के एक चुनाव में भाजपा की बड़ी सफलता के पीछे हिंदुत्व और सामाजिक न्याय की राजनीति केबीच साधा गया संतुलन रहा है। इसी संतुलन के कारण भाजपा को नब्बे के दशक के शुरुआती दौर के बाद पिछड़ा वर्ग का भरपूर समर्थन मिला। चुनाव रणनीति से जुड़े एक प्रमुख नेता के मुताबिक अगर ऐसे समय में सीएम को अयोध्या या मथुरा से उम्मीदवार बनाया जाता तो चुनाव प्रचार पर हिंदुत्व के मुद्दे का हावी होने और सामाजिक न्याय के मुद्दे के पीछे छूट जाने का डर था।

पिछ़ड़ा विरोधी होने के प्रचार का जवाब देने की तैयारी
विपक्ष के पिछड़ा विरोधी होने संबंधी आरोपों का जवाब देने के लिए भी पार्टी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। इसमें टिकट वितरण में इस वर्ग को वरीयता, प्रधानमंत्री को ओबीसी का सबसे बड़ा चेहरा के रूप में प्रचारित करने, सहयोगी दलों की अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद के जरिए विपक्ष पर जवाबी हमला बोलने की है। इसके अलावा डिप्टी सीएम मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सहित ओबीसी से जुड़े दर्जन दिग्गज नेता जल्द ही मुखर होंगे।
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संतुलन बनाए रखने की नीति
पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि आवास, बिजली, हर घर जल, मुफ्त अनाज, किसान सम्मान निधि, उज्जवला जैसे योजनाओं का लाभ खासतौर पर पिछड़ों-दलितों को मिला है। राज्य के प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, हमें जनकल्याण के योजनाओं पर भरोसा है। हम गरीब कल्याण के मुद्दे पर भी मैदान में उतरेंगे।
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