केन्द्र सरकार की योजना पर यदि ढंग से अमल हुआ तो वह दिन दूर नहीं है जबकि गंगा नदी से निकले मिथेन गैस से उत्तर प्रदेश में बसें चलेंगी। ऐसा होने पर बस का किराया घट कर आधा रहा जाएगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार की गई इस तरह की योजना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात हो गई है वहां से इस पर सहमति मिली है।
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि केन्द्र ने उत्तर प्रदेश में मिथेन और इथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन से सार्वजनिक परिवहन के साधनों यथा- बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा चलाने की योजना बनायी है। इस बारे में उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर ली है और वहां से इस पर हरी झंडी मिल गई है।
गंगा के पानी से निकाला जाएगा मिथेन
जल संसाधन एवं गंगा पुनरूद्घार मंत्रालय भी संभाल रहे गडकरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी आदि शहरों में गंगा का पानी काफी प्रदूषित हो गया है। इसलिए गंगा को स्वच्छ करने के लिए उन्होंने सफाई की 150 परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इन परियोजनाओं अंतिम रूप दे कर अगले महीने से काम शुरू कर देने की योजना है। तय किया गया है कि गंगा के पानी को साफ करने के क्रम में गंदे पानी से मिथेन गैस निकाला जाएगा और उससे बस और टैक्सी चलायी जाएगी।
नागपुर में कर चुके हैं ऐसा प्रयोग
उन्होंने बताया कि गंदे पानी से मिथेन निकाल पर बस चलाने की योजना कोई नई नहीं है, इसका परीक्षण वह नागपुर में कर चुके हैं। वहां सीवर के पानी से मिथेन गैस निकाला जाता है और उससे शहर में बसें चलती हैं। यही नहीं, वहां तो सीवर के पानी से बिजली भी निकाली जा रही है। सीवर का पानी बेचने से नगर निगम को 18 करोड़ रुपये की आमदनी भी हुई।
इथनॉल से भी चलेंगे वाहन
गडकरी के मुताबिक धान, गेहूं या गन्ना काटने के बाद बचे पुआल या अवशेष से इथनॉल बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। एक टन पुआल से 280 लीटर इथनॉल बनाया जा सकता है। अब बसों या अन्य मोटर वाहनों में ऐसे फ्लैक्सी इंजन लग चुके हैं, जिन्हें 100 फीसदी इथनॉल पर चलाया जा सकता है। यही नहीं, इससे ऑटो रिक्शा और बाइक भी चलाया जा सकता है।