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मायावती का सीएम से पीएम बनने का सपना!: आखिर किस भरोसे से बोल रहीं यूपी में अब नहीं बनेगा सपा का कोई मुख्यमंत्री?

आशीष तिवारी
Updated Sat, 30 Apr 2022 09:42 AM IST

सार

राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि बीते कुछ समय से इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि मायावती अगली दलित राष्ट्रपति हो सकती हैं। वह कहते हैं कि इस बात का प्रचार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान जबरदस्त तरीके से किया गया। नतीजा बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक में जबरदस्त तरीके से सेंध मारी हो गई...
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मायवती ने अखिलेश पर साधा निशाना - फोटो : Amar Ujala

 

पार्टी के प्रमुख नेताओं ने इस बात का खुलकर खंडन करने को कहा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर इस बात का मायावती की ओर से खंडन नहीं किया जाता, तो पार्टी को आने वाले और विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों में जबरदस्त नुकसान होने का अनुमान था। यही वजह रही कि मायावती ने पूरा चुनावी गणित समझाते हुए गुरुवार को खुद को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री से देश की प्रधानमंत्री बनने तक का पूरा रोड मैप जनता के सामने रख दिया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा कि वह राष्ट्रपति नहीं बनने वाली हैं।

सीएम से पीएम बनने तक की हसरतों का रोडमैप

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मायावती ने जिस तरीके से शुक्रवार को समाजवादी पार्टी पर खुलकर हमला किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का सीएम बनने का सपना अब कभी पूरा नहीं हो सकता, उसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक जीडी सिंह कहते हैं कि दरअसल मायावती को अपनी कमजोरी का अहसास तो हुआ है, लेकिन वह इस बात को बखूबी जानती हैं कि समाजवादी पार्टी के साथ उनका बड़ा वोट बैंक टिकने वाला नहीं है। यही वजह है कि मायावती ने समाजवादी पार्टी के साथ हुए अपने गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि इतने बड़े गठजोड़ के साथ भी सपा महज पांच सीटें ही जीत कर लोकसभा पहुंची थी। राजनीतिक विश्लेषक जीडी सिंह कहते हैं कि मायावती यह बताना चाहती हैं कि जो वोट बैंक समाजवादी पार्टी का है, अगर वही उनके साथ आ जाए यानी कि मुस्लिम समुदाय उनके साथ आ जाता है तो मुस्लिम और दलित की ताकत से वह न सिर्फ समाजवादी पार्टी को सत्ता से बाहर रख पाएंगी, बल्कि अपने सपने को भी पूरा करने की ओर बढ़ सकेंगी।



मायावती ने कहा कि अगर दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिमों और उच्च जाति का गरीब तबका उनके साथ जुड़ जाता है, तो बहुजन समाज पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में बन सकती है और यही तबका अगर उनके साथ राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ता है तो देश कि प्रधानमंत्री भी मायावती बन सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बात बिल्कुल सच है कि दलित और मुस्लिम अगर एक साथ होगा, तो उसका किसी भी राजनीतिक दल को बड़ा फायदा हो सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में यह जातिगत समीकरण पूरी तरीके से ध्वस्त हो गए थे। हालांकि मायावती को इस लोकसभा चुनावों में जबरदस्त तरीके से फायदा हुआ था। मायावती 0 से 10 सीटों पर पहुंच गई थीं, जबकि समाजवादी पार्टी महज पांच सीटें ही मिली थीं। वह कहते हैं कि मायावती ने जिस आधार पर समाजवादी पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता से बाहर रहने की बात कही है, उसके पीछे जातिगत समीकरणों की यही पूरा गणित है।

बसपा-भाजपा एक हैं!

वहीं सपा प्रवक्ता कहते हैं कि यह मायावती की सिर्फ हताशा है। वह कहते हैं कि मायावती और उनकी पार्टी पूरी तरीके से समाप्त हो चुकी है। पार्टी एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि बसपा और भाजपा तो एक ही पार्टी हैं। उन्होंने कहा जिस तरीके से बसपा ने इस विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जो परिणाम सामने आए हैं उससे कोई भी बात छुपी हुई नहीं है। वह कहते हैं कि अब देश और प्रदेश की जनता को यह बताने की जरूरत नहीं है कि बसपा किसके साथ खड़ी है। वहीं बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर बसपा सुप्रीमो मायावती राष्ट्रपति मामले में जनता के सामने सीधे तौर पर सामने नहीं आतीं, तो इसका संदेश पार्टी के लिए बहुत अच्छा नहीं होता। वह कहते हैं कि विपक्षी मायावती को राष्ट्रपति जैसे पद पर पहुंचाने की बात करके पार्टी का जबरदस्त तरीके से नुकसान कर रहे थे।

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