यूपी के एटा में छलके मौत के प्यालों ने 28 जिंदगियां निगल लीं। पिछले साल एटा से ही आई शराब से आगरा में 11 लोग मारे गए थे। पुलिस की रिपोर्ट ही यह बताती है कि आगरा जोन के आठ जिलों में अवैध शराब का सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है एटा। सफेदपोशों के संरक्षण में फल-फूल रहे माफिया शराब में यूरिया तक की मिलावट कर रहे हैं।
इसकी तस्दीक आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट करती है। अवैध शराब के नमूनों में यूरिया भी पाया जा रहा है। ऐसा नशा बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसे मिथाइल अल्कोहल में मिलाया जाए तो बेहद खतरनाक हो जाता है। लैब के केमिस्ट्री सेक्शन में प्रदेश के 28 जनपदों से शराब के सैंपल आते हैं। इनके परीक्षण से पता चलता है कि वेस्ट यूपी में मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ बड़े गढ़ हैं। यहां गन्ने के रस से लहन तैयार कर अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) मिलाकर कच्ची शराब तैयार की जाती है। नौसादर की मात्रा बढ़ाए जाने पर यह जहरीली हो जाती है।
आगरा जोन में लहन सीरे से तैयार किया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में महुआ से तैयार किया जाता है। आगरा जोन के सैंपल की रिपोर्ट बताती है कि यहां पिछले तीन चार सालों से शराब को ज्यादा से ज्यादा नशीला बनाने के लिए माफिया तरह तरह के प्रयोग कर रहे हैं। कभी नौसादर की मात्रा बढ़़ाते हैं तो कभी यूरिया की मिलावट करते हैं।