यूपी के इलाहाबाद में मांडा रोड रेलवे स्टेशन पर रविवार रात कालका हादसे में ट्रेन से कटकर जान गंवाने वाली बसंती देवी बीमार पति रविंद्र कुमार के इलाज के लिए नासिक जा रही थी। पत्नी के शव को देखकर बिलख रखे रविंद्र कुमार ने बार-बार यही कहता रहा कि आंखों के सामने पत्नी कट गई और वह उसे बचा नहीं पाया।
दिव्यांग रविंद्र कुमार को इस बात का मलाल है कि वह अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाया। बिहार में पटना जिले के करनौल का रविंद्र कुमार काफी दिनों से बीमार हैं। काफी इलाज के बाद भी आराम नहीं हुआ। रविंद्र कुमार ने बताया कि उनका एक बेटा रिश्तेदार के साथ नासिक में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। उसने ही फोन कर कहा कि वहां इलाज के बाद भी आराम नहीं हो रहा है तो यहां आ जाइए।
बेटे के बुलावे के बाद रविवार को रविंद्र कुमार पत्नी बसंती देवी और भतीजे राजकुमार के साथ भागलपुर-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस से नासिक जा रहा था। ट्रेन से धुआं उठने के बाद ट्रेन मांडा रोड पर धीमी हुई तो बसंती और भतीजे तो कूद गए। रविंद्र कुमार नहीं कूद पाया। रविंद्र की आंखों के सामने ही पत्नी बसंती ट्रेन से कट गई।
जुबां पर हादसे का दर्द, आंखों में खौफ का मंजर
मांडा रोड स्टेशन के पास हुआ हादसा
- फोटो : Railinfo
भागलपुर-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस रविवार रात करीब दस बजकर बीस मिनट पर जैसे ही छिवकी स्टेशन पहुंची। उसके इंजन से सटी दो जनरल बोगी से यात्री का हुजूम प्लेटफार्म पर उतर कर खुली हवा में सांस लेने लगा था। सभी यात्रियों की जुबां पर मांडा स्टेशन में हुए हादसे का दर्द और उनकी आंखों में खौफ का मंजर झलक रहा था। यात्रियों ने हादसे का जिक्र किया तो उनकी जुबां लड़खड़ा रही थी। बताया लाल साड़ी में लिपटी एक महिला के चीथड़े उड़ते देख एक साथ कई यात्री चीख पड़े थे।
इंजन से सटी दूसरी जनरल बोगी में कई यात्रियों के जूते-चप्पल पड़े थे। जो बोगी में भगदड़ की स्थिति बयां कर रहे थे। बोगी में काफी खून भी गिरा था। एक युवक भगदड़ में बोगी से कूदने जा रहा था जिसे अन्य यात्रियों ने पकड़ लिया, वरना वह भी ट्रेन की चपेट में आ जाता। उसको खींचते समय उसका पैर पोल से टकरा गया। जिससे उसके घुटने की हड्डी टूट गई और खून बोगी में फैल गया। जनरल बोगी में मुंबई तक यात्रा कर रहे झारखंड निवासी हुमायूं शेख ने बताया कि वह अपने पांच साथियों के साथ मुंबई के दाना बंदर जा रहा है।
हादसे के बाद से उसका एक साथी भी लापता है। बोगी में सवार भूजो देवी ने बताया कि उसका पति अनिल्य भी इस हादसे के बाद से गायब है। बिहार के बीरबल नामक छात्र लड़खड़ाती जुबान से घटनाक्रम के बारे में बताया। झारखंड निवासी नाजिम, बिहार निवासी संतोष एवं राजेंद्र की आंखों में हादसे का जिक्र करते हुए खौफ का मंजर साफ दिख रहा था। ट्रेन के गार्ड बीडी लाल चंदाकी और चालक एलबी पाठक ने अपने लिखित बयान में हादसे से जैसी बात से इंकार किया है।
कुछ इस तरह हुआ यह दर्दनाक हादसा
ट्रेन
कालका मेल से रविवार शाम कटे यात्रियों की मौत की मुख्य वजह एक जानवर रहा। दरअसल भागलपुर-एलटीटी एक्सप्रेस से रविवार की शाम एक जानवर कट गया था। इस वजह से ट्रेन के ड्राइवर को इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकना पड़ा। ब्रेक लगाने की वजह से निकली चिंगारी और धुएं को यात्रियों ने कुछ और ही समझा। कोई अनहोनी न हो इसके लिए उसके यात्री ट्रेन से कूदकर सुरक्षित स्थान तलाशने के लिए मांडा रोड स्टेशन के प्लेटफार्म की तरफ भागे, लेकिन इस बीच डाउन लाइन पर आई कालका मेल उनके लिए काल बन गई।
ट्रेन से कटकर चार यात्रियों की मौत हो गई। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने इस मामले में जांच बिठा दी है। गाड़ी संख्या 12335 भागलपुर एक्सप्रेस शाम सात बजे मिर्जापुर से चली। उसका अगला स्टॉपेज छिवकी (इलाहाबाद) में था। शाम 7.45 बजे के आसपास मांडा रोड के मिर्जापुर छोर पर भागलपुर एक्सप्रेस से अचानक एक जानवर कट गया। यह देख ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। इससे इंजन से चिंगारी और धुआं निकलने लगा। इंजन से धुआं निकलता देख ट्रेन के जनरल कोच में बैठे यात्री डर गए।
यात्रियों ने चेनपुलिंग की और ट्रेन के रुकते ही नीचे उतर लाइन पार कर प्लेटफार्म की तरफ भागने लगे। वहां भगदड़ जैसी स्थिति हो गई। इसी बीच डाउन लाइन पर आ रही कालका मेल की चपेट में चार यात्री आ गए। थोड़ी ही देर में वहां चीख पुकार मच गई। उधर रेलवे कंट्रोल को यह सूचना मिली तो इलाहाबाद से मौके पर एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (एआरटी) और एंबुलेंस भेज दी गई। हादसे के बाद काफी देर तक भागलपुर-एलटीटी मांडा रोड में ही खड़ी रही। बताया जा रहा है कि मांडा रोड पर प्लेटफार्म की ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से यात्री ऊपर चढ़ नहीं सके थे और कालका की चपेट में आ गए।