डार्क नेट और बिटकॉइन के इस्तेमाल से दवा व गैरकानूनी ड्रग्स की तस्करी बढ़ रही है। वहीं इस ड्रग को नशा न करने वाले निर्दोष युवाओं तक पहुंचाने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे एंटी नॉर्कोटिक्स एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं। नॉर्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की 2017 की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ नए ड्रग और कुछ विशेष आयुर्वेदिक सामग्री नए क्षेत्र में बेची जा रही है। इससे एजेंसी को मुकाबला करना पड़ रहा है। हाल के साल में इंटरनेट खासकर डार्क नेट और बिटकॉइन के जरिये ड्रग की खरीद के मामले बढ़ रहे हैं।
यह चिंताजनक है क्योंकि यूजर की नई आबादी आसानी से ये ड्रग्स हासिल कर ले रही है। जबकि यह सब कुछ गैरकानूनी है, लेकिन डार्क नेट पर न उन्हें अपराधियों और न कानूनी एजेंसियों का कोई डर होता है। इसलिए ड्रग की ट्रैफिकिंग में बिटकॉइन का इस्तेमाल बढ़ रहा है क्योंकि इसमें शामिल होने वाले वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करना काफी मुश्किल होता है।
यह गैरकानूनी करेंसी है, लेकिन इसे आसानी से रुपये और डॉलर में बदला जा सकता है। देश में पहली बार इस तरह के दो केस 2017 में सामने आए थे। जुलाई में तीन विदेशी समेत 21 लोग तेलंगाना में ड्रग्स के साथ पकड़े गए थे। अक्तूबर में दिल्ली में दो आरोपी दिल्ली में गिरफ्तार हुए थे जो एनसीआर की एक रेव पार्टी में ड्रग सप्लाई करने जा रहे थे।