डब्ल्यूएचओ ने सुझाव दिया कि एआई जनित भाषा मॉडल (एलएलएम) टूल जैसे चैटजीपीटी, बार्ड, बर्ट और कई अन्य ऐसे साधन जो मानव समझ की नकल करते हैं, को ध्यान में रखते हुए दिया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में ऐसे उपकरणों का समावेशन कठोर मूल्यांकन के पश्चात होना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बगैर निगरानी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। संगठन ने माना कि एआई चिकित्सा पेशेवरों, रोगियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को लाभान्वित तो कर सकता है लेकिन किसी भी नई तकनीक की तरह, व्यापक उपयोग से पहले इसके जोखिमों की जांच की जानी चाहिए।
विज्ञापन
डब्ल्यूएचओ ने सुझाव दिया कि एआई जनित भाषा मॉडल (एलएलएम) टूल जैसे चैटजीपीटी, बार्ड, बर्ट और कई अन्य ऐसे साधन जो मानव समझ की नकल करते हैं, को ध्यान में रखते हुए दिया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में ऐसे उपकरणों का समावेशन कठोर मूल्यांकन के पश्चात होना चाहिए। इसके मूल्यों का कड़ाई से पालन करना जरूरी है। एआई को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किए जाने वाला डेटा पक्षपाती या भ्रामक हो सकता है। यह गलत जानकारी दे सकता है, जो रोगियों के लिए भारी नुकसानदेह हो सकता है। डब्ल्यूएचओ ने सिफारिश की है कि नीति निर्माता रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जबकि प्रौद्योगिकी कंपनियां एलएलएम का व्यावसायीकरण करने के लिए काम करती हैं।
सावधानी जरूरी : ऑल्टमैन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट, चैटजीपीटी के मुख्य कार्यकारी सैमुअल ऑल्टमैन ने अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों के सामने माना था कि एआई की स्थापना इस विश्वास पर की गई थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हमारे जीवन के लगभग हर पहलू को बेहतर बनाने की क्षमता है, लेकिन यह भी सत्य है कि यह गंभीर जोखिम भी पैदा करता है। इसे प्रबंधित करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा।