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US Tariff : भारत पर कब से लागू होगा ट्रंप का टैरिफ और क्या होगा असर? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

Fri, 04 Apr 2025 06:55 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ट्रंप के 60 देशों पर पारस्पिरक टैरिफ लगाया है। इनमें भारत भी शामिल है। भारत पर 27 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इसके प्रभाव को लेकर मंथन चल रहा है। हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि इसके चलते अमेरिकी बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। साथ ही प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी। 

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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बाद से यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब, जब ट्रंप ने जवाबी टैरिफ की घोषणा कर दी है तो सबके मन में कहीं न कहीं सवाल उठ रहा होगा कि आखिर टैरिफ लगाने के मायने क्या हैं। भारत पर यह कब से लागू होगा और इसका कितना भार पड़ेगा। हमारी-आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा? ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब...

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 टैरिफ होता क्या है?
यह वस्तुओं के आयात पर लगाए जाने वाला सीमा शुल्क या आयात शुल्क है, जिसे आयातक की तरफ से सरकार को देना होता है। आम तौर पर कंपनियां इनका बोझ उपयोगकर्ताओं पर डालती हैं। दूसरे शब्दों में इसका असर आम लोगों की जेब पर ही पड़ता है।
 
जवाबी टैरिफ क्या है?
यह शुल्क व्यापारिक साझेदारों की तरफ से लगाए जा रहे शुल्क में वृद्धि या उच्च शुल्क के जवाब में लगाया जाता है। यानी एक तरह से जैसे को तैसा वाला जवाबी कदम होता है।

 भारत पर कितना शुल्क?
इस्पात, एल्युमीनियम और वाहनों तथा कलपुर्जों पर पहले से ही 25% शुल्क लागू है। शेष उत्पादों पर 5 से 8 अप्रैल के बीच 10% का मूल (बेसलाइन) शुल्क लगेगा और 9 अप्रैल से बढ़कर 27% हो जाएगा।
 
अमेरिका की मंशा क्या है?

इससे अमेरिका में घरेलू विनिर्माण बढ़ेगा। अमेरिका का कुछ देशों खासकर चीन के साथ भारी व्यापार असंतुलन है। 2023-24 में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 35.31 अरब अमेरिकी डॉलर था।

किन क्षेत्रों को छूट?
एक विश्लेषण के मुताबिक, दवा, सेमीकंडक्टर, तांबे के अलावा तेल, गैस, कोयला, एलएनजी जैसे ऊर्जा उत्पाद इसके दायरे से बाहर रखे गए हैं।

भारत के लिए यह कितनी बड़ी चुनौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिति अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर है। भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन इसके लिए उसे व्यापार को आसान बनाना होगा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा।

 यह भी पढ़ें- Trump Tariff: 'टैरिफ से कोई झटका नहीं, इसका असर मिलाजुला', 26% जवाबी शुल्क के प्रभाव की समीक्षा कर रही सरकार

अमेरिका से व्यापार समझौता कितना फायदेमंद होगा?
पीएम नरेंद्र मोदी ने फरवरी में अमेरिका यात्रा के दौरान 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने की घोषणा की थी। ऐसे समझौताें में व्यापारिक साझेदार या तो सीमा शुल्क काफी कम कर देते हैं या अधिकतर वस्तुओं पर उन्हें समाप्त कर देते हैं। सेवाओं और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मानदंडों को भी आसान बनाया जाता है।

अन्य देशों पर कितना शुल्क?
चीन पर 54%, वियतनाम पर 46%, बांग्लादेश पर 37% और थाइलैंड पर 36% शुल्क लगाया।
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क्या डब्ल्यूटीओ के अनुरूप है टैरिफ?
ये शुल्क स्पष्ट तौर पर विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन करते हैं। यह एमएफएन (तरजीही राष्ट्र) दायित्वों तथा बाध्य दर प्रतिबद्धताओं के भी खिलाफ हैं। सदस्य देशों को इनके खिलाफ डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र का दरवाजा खटखटाने का पूरा अधिकार है।

अमेरिका-भारत सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार
  • वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। अमेरिका की भारत के कुल माल निर्यात में हिस्सेदारी करीब 18%, आयात में 6.22% और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% है।
  •  अमेरिका के साथ 2023-24 में भारत का व्यापार अधिशेष (आयात व निर्यात में अंतर) 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  •   यह 2022-23 में 27.7 अरब, 2021-22 में 32.85 अरब, 2020-21 में 22.73 अरब और 2019-20 में 17.26 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
ये भी पढ़ें- US: भारत समेत कई देशों पर जवाबी टैरिफ के बाद घर में ही घिरे ट्रंप; साथियों ने विपक्षी डेमोक्रेट्स का दिया साथ  

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