अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंच गए हैं। वह दोपहर करीब 2:15 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। उनके साथ उनकी पत्नी जेनेट डौसडेबेस रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद हैं। इसके अलावा उनके साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। मुंबई पहुंचने के बाद रुबियो ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ शहर के ऐतिहासिक 'गेटवे ऑफ इंडिया' का दौरा किया।
रुबियो से मुलाकात से पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। विदेश मंत्री ने बताया कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक, भारत में कारोबार की सुगमता और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। 20 से 22 अक्टूबर तक चलने वाली इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा, व्यापार और निवेश, रक्षा तथा महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाना है। साथ ही दोनों पक्ष पश्चिम एशिया संकट पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
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इस साल मार्को रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले मई में अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी और 'क्वाड' विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। मुंबई के कार्यक्रमों के तहत मार्को रुबियो 26/11 मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज महल पैलेस होटल स्थित ताज मेमोरियल पहुंचे और पुष्पांजलि अर्पित की। इस आतंकी हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे।
इसके बाद वह ताज पैलेस में ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक में शामिल हुए, जहां 'भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। मंगलवार शाम को रुबियो जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित 'फ्रीडम 250 रिसेप्शन' में भी हिस्सा लेंगे। मुंबई में कार्यक्रमों के बाद बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री गुजरात के जामनगर जाएंगे, जो देश का एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र है।
इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत को बनाए रखने और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का एक अच्छा अवसर है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। भारत आने से पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा था कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। उन्होंने संकेत दिया कि रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की तरफ से टैरिफ में छूट देने का फैसला भी इसी से जुड़ा है।
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पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों (जिनमें भारत भी शामिल है) के खिलाफ लगे कुछ प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया था। रुबियो ने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि प्रतिबंधों और शुल्कों पर विचार करते समय भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत और अमेरिका साल 2025 की शुरुआत से ही प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका मकसद टैरिफ से जुड़े मतभेदों को सुलझाना, गैर-टैरिफ रुकावटों को खत्म करना और एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच को आसान बनाना है। भारत अपने सामानों के लिए प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शर्तों की मांग कर रहा है। हाल ही में जयशंकर ने भी कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता किसी अंतिम नतीजे के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
रुबियो का यह दौरा दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनावों के बीच हो रहा है। पिछले साल जब वाशिंगटन ने भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए थे, तब रिश्तों में कड़वाहट आई थी। इसके अलावा मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने को लेकर ट्रंप के बयानों पर भी भारतीय अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अमेरिका की नई आव्रजन नीति, एच1बी (H-1B) वीजा फीस में बढ़ोतरी और टीसीएस व विप्रो जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन-कार्ड प्रोसेस पर लगी पाबंदियों से भी दोनों देशों के संबंधों में खिंचाव देखा गया था।