कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि न्यायपालिका पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणी टकराव को अंजाम देने के लिए एक गेम प्लान का हिस्सा थी। उन्होंने उनके पूर्ववर्ती एम. वेंकैया नायडू की 2020 की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान राज्य के तीनों अंगों में सर्वोच्च है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने बुधवार को कहा कि न्यायिक मंचों से दूसरों पर हावी होना और सार्वजिक रूप से दिखावा करना अच्छा नहीं है और इन संस्थानों को पता होना चाहिए कि खुद को कैसे संचालित करना है। कॉलेजियम प्रणाली के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद धनखड़ ने न्यायपालिका की आलोचना की थी।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने हमला तेज कर दिया है। पार्टी के महासचिव व संचार प्रभारी जयराम रमेश ने ट्वीट किया, चिदंबरम ने न्यायपालिका पर उपराष्ट्रपति की टिप्पणी का स्पष्ट रूप से यह कहकर विरोध किया है कि संविधान सर्वोच्च है, न कि संसद। ठीक एक साल पहले धनखड़ के पूर्ववर्ती वेंकैया नायडू ने वही कहा था जो चिदंबरम ने कहा था।
रमेश ने नायडू की टिप्पणियों की एक आधिकारिक विज्ञप्ति को टैग किया है जो उन्होंने नवंबर 2020 में केवडिया (गुजरात) में पीठासीन अधिकारियों की 80वें अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान की थीं।
अपनी टिप्पणी में नायडू ने कहा था कि राज्य के तीनों अंगों में से कोई भी सर्वोच्च होने का दावा नहीं कर सकता है, क्योकि केवल संविधान ही सर्वोच्च है और विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका संविधान में परिभाषित संबंधित डोमेन के भीतर काम करने के लिए बाध्य हैं।
न्यायपालिका पर धनखड़ की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा, यह स्पष्ट रूप से न्यायपालिका औरक सरकार के बीच टकराव का एक गेम प्लान है। तरह-तरह की आवाजें उठाई जा रही हैं। प्रतिबद्ध न्यायपालिका होना एक बात है लेकिन अगर उद्देश्य न्यायपालिका पर कब्जा करना है तो मुझे लगता है कि लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह टकराव की साजिश रचने के गेम प्लान का हिस्सा है।
इस साल केशवानंद भारती के फैसले की 50वीं वर्षगांठ होगी। इसे देखते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर कोई एक फैसला है जिसे हर राजनीतिक दल ने बरकरार रखा है, तो वह यही है। उन्होंने कहा, मैंने अटल बिहारी वाजपेयी को केशवानंद भारती के फैसले के पक्ष में बोलते हुए सुना है। मैंने लालकृष्ण आडवाणी को इसके पक्ष में बोलते देखा है। अरुण जेटली को कई बार सुना है कि कैसे केशवानंद भारती मामला एक मील का पत्थर है।