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UPI MDR Rules: UPI पर नया चार्ज! टिकट बुकिंग से हवाई सफर तक बढ़ सकता है आपकी जेब पर बोझ

सार

जानकारों का साफ कहना है कि कंपनियां सीधे फीस वसूलने के बजाय अप्रत्यक्ष रास्तों से इसका पूरा बोझ आपकी ही जेब पर डालने की तैयारी करेंगी।
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यूपीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगर आप सोचते हैं कि यूपीआई से हर लेन-देन हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त रहने वाला है, तो आपको इस नए नियम का गणित समझना होगा। सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने बड़ा फैसला लेते हुए पर्सन-टू-मर्चेंट  ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया है। नए नियम के तहत 2 हजार रु. से अधिक के व्यावसायिक पेमेंट पर 5 रुपये से लेकर अधिकतम 300 रुपये तक की एमडीआर फीस लागू होगी।
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हालांकि, आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि आपसी लेनदेन पूरी तरह फ्री रहेगा। बैंकों व ऐप्स को सख्त निर्देश हैं कि वे यह फीस सीधे ग्राहकों से न वसूलें। कागजों पर ग्राहक के लिए कुछ नहीं बदला, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अलग नजर आ रही है। जानकारों का साफ कहना है कि कंपनियां सीधे फीस वसूलने के बजाय अप्रत्यक्ष रास्तों से इसका पूरा बोझ आपकी ही जेब पर डालने की तैयारी करेंगी।

टिकट बुकिंग पर बढ़ सकता है सुविधा शुल्क
वर्तमान स्थिति में आईआरसीटीसी ऑनलाइन टिकट बुकिंग में यूपीआई से भुगतान पर नॉन-एसी टिकट के लिए 10 रुपये और एसी टिकट के लिए 20 रुपये सुविधा शुल्क लेता है। इस पर जीएसटी अलग से लगता है। जबकि क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान करने पर सुविधा शुल्क 15 से 30 रुपये तक है। इस पर भी जीएसटी अलग से लगता है। जानकारों का कहना है, अब 2 हजार रुपये से ऊपर के हर यूपीआई भुगतान पर लगने वाले 5 रुपये एमडीआर के अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए आईआरसीटीसी भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और सिक्योरिटी अपग्रेड का नाम देकर यूपीआई की सुविधा शुल्क को एडजस्ट सकता है।
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रेलवे का कहना है, इस व्यवस्था से आम यात्रियों पर कोई बोझ नहीं आएगा। आईआरसीटीसी के मुताबिक, फिलहाल नए शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है। यात्रियों को इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। आईआरसीटीसी सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 13 से 14 लाख रेल टिकट बुक करता है। त्योहारों के दौरान यह आंकड़ा 20 लाख से ज्यादा पहुंच जाता है। रेलवे के कुल आरक्षित टिकटों में ऑनलाइन बुकिंग की हिस्सेदारी करीब 89 से 90 प्रतिशत है। इसमें आईआरसीटीसी की वेबसाइट और ऐप शामिल हैं।

हवाई सफर पर दिख सकता है असर
एयरलाइन और ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के लिए इसका असर ज्यादा हो सकता है। घरेलू फ्लाइट का एक औसतन टिकट 4,000 से 5,000 रुपये का होता है। इसका सीधा मतलब है कि एविएशन सेक्टर में लगभग हर ऑनलाइन टिकट बुकिंग 2,000 रुपये की लिमिट को पार कर जाएगी। एयरलाइंस और ट्रैवल पोर्टल्स पर जब 0.4 प्रतिशत का यूपीआई एमडीआर लागू होगा (उदा. 10,000 रुपये के टिकट पर 40 रुपये का एमडीआर), तो कंपनियां इस घाटे को खुद बर्दाश्त नहीं करेंगी।

जानकारों का कहना है, हवाई कंपनियां और बुकिंग पोर्टल्स पहले से ही प्रति पैसेंजर 300 से 400 रुपये तक कन्वेनिएंस फीस वसूलते हैं। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सहने के बजाय एयरलाइंस अपनी कन्वेनिएंस फीस और सीट सिलेक्शन फीस की में बढ़ोतरी कर सकती हैं। कुछ एयरलाइंस इस अतिरिक्त शुल्क को अलग से दिखा सकती हैं, जबकि कुछ इसे अन्य सेवाओं की फीस में शामिल कर सकती हैं।
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