यूपीआई पर लगा मर्चेंट डिस्काउंट रेट आने वाले वक्त में नकद लेन -देन को और बढ़ा सकता है। जो लोग इस शुल्क के दायरे में हैं, उन्हें इस खर्च को खुद वहन करना है। इस बात की आशंका है कि वह देर सबेर इसका खर्च ग्राहकों पर डालने के लिए कोई दूसरा रास्ता निकाल सकते हैं। हालांकि सरकार ने ग्राहकों पर इसका कोई असर न पड़ने की बात कही है। डिजिटल भुगतान की लागत के बोझ से बचने के लिए उपभोक्ता व छोटे बड़े व्यापारियों में नकदी की डिमांड अब और बढ़ेगी। हालत यह है कि यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद पहले से ही बाजार में रिजर्व बैंक नोटों की सप्लाई बढ़ाता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो कारोबारी कम मार्जिन पर काम करते हैं, उनके लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट की बढ़ी लागत देने के बजाए नकद इस्तेमाल अपेक्षाकृत सस्ता ही पड़ेगा। ऐसे में आने वाले वक्त लोग स्कैन, स्वाइप व टैप के जरिए डिजिटल भुगतान के बजाए कागजी मुद्रा के जरिए भुगतान की ओर मुड़ सकते हैं।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष मुर्मु ने पिछले दिनों एक सेमिनार में कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी का चलन डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाए जाने के बावजूद लगातार बढ़ रहा है। सांख्यिकी मंत्रालय का भी कहना है कि लोगों का मासिक उपभोग व्यय में 164 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसलिए ग्रामीण इलाकों व छोटे शहरों में खर्च के लिए नकदी का भी खूब इस्तेमाल हो रहा है। छोटे कस्बों एटीएम से नकदी निकालने की प्रवृत्ति भी कम नहीं हुई है। शुल्क देने वाले बड़े मर्चेंट इसे कब तक व किस रूप में लेते हैं। यूपीआई से लेनदेन करते समय ग्राहक को यह शुल्क नहीं देना होगा।
खास बातें
-भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक इस साल 28 अगस्त तक लगभग 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं। इनका मूल्य 42,40,488 करोड़ रुपये है।
-14,53,414 लाख सिक्के भी चलन में हैं।
-हर साल छह मूल्यवर्ग में करीब 28-30 अरब नए नोट छापे जाते हैं और 21 अरब नोटों पुराने व कटने फटने के कारण वापस लिए जाते हैं। भारत में 55 करोड़ से अधिक लोग यूपीआई डिजिटल भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं।
नकदी के इस्तेमाल की बढ़ने की वजह
एक और जहां डिजिटल पेमेंट बढ़ रहा है, वहीं नकदी की डिमांड भी बढ़ रही है। भारत में कई धर्मस्थलों में दान व चंदा नकद ही दिया जाता है। रियल इस्टेट में तो नकद का चलन अब और बढ़ रहा है। स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए जमीन या भवन खरीदने व बेचने वाले लेनदेन की रकम कम दिखाते हैं और बाकी राशि का नकद भुगतान नकद ही रखते हैं। घरों में महिलाएं व बुजुर्ग भी मुश्किल वक्त के लिए नकद रखते हैं।